रावी, सतलज, और व्यास नदी उफान पर… चंडीगढ़-मनाली राजमार्ग के सड़कें बह गईं
उत्तर भारत जलमग्न है बादल फटने की घटनाएं बढ़ रही हैं. पानी के प्रकोप से लोग हैरान और परेशान हैं. मदद की आस लगाए बैठे हैं. मौसम विभाग ने अगस्त के अंत में केवल 72 घंटों में 300-350 मिमी बारिश दर्ज की, जो इस अवधि के औसत से लगभग तीन गुना ज्यादा है. अधिकारियों और मौसम वैज्ञानिकों ने इसे चार दशकों से भी ज्यादा समय में उत्तर भारत में आई सबसे भीषण बाढ़ बताया है. सिंधु, रावी, सतलज, झेलम, चिनाब और व्यास नदियों वाली सिंधु नदी प्रणाली उफान पर आ गई. इसका सबसे पहला खतरा हिमाचल प्रदेश को झेलना पड़ा. लगातार बादल फटने के कारण कुल्लू, मंडी और किन्नौर जिले की खड़ी ढलानें ढह गईं और चट्टानें और मलबा नदी घाटियों में गिरने लगा.
व्यास और सतलज नदियों ने कई हिस्सों में तटबंधों को तोड़ दिया. चंडीगढ़-मनाली राजमार्ग के कुछ हिस्सों सहित 250 से ज्यादा सड़कें बह गईं. विशाल नाथपा झाकड़ी जलविद्युत संयंत्र सहित सतलज पर स्थित बिजली परियोजनाओं को बंद करने पड़े. शिमला और कुल्लू के सेब के बाग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए. यहां की सालाना उपज लगभग 5 हजार करोड़ रुपये होती है. हिमाचल प्रदेश के अधिकारियों का अनुमान है कि 10,000 हेक्टेयर से ज्यादा बागवानी जमीन बर्बाद हो गई है, जिससे किसानों की आय कम से कम दो सीजन पीछे चली गई है. 31 अगस्त तक, हिमाचल प्रदेश में 220 से ज्यादा मौतें और 12,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति का नुकसान दर्ज किया गया था.
जम्मू में चिनाब और झेलम नदी खतरनाक रूप से बढ़ गईं. राजौरी और पुंछ में पुल माचिस की तीलियों की तरह ढह गए, जिससे गांव अलग-थलग पड़ गए. श्रीनगर में झेलम नदी के खतरे के निशान की ओर बढ़ते देख लोगों की 2014 की भयावहता याद आ गई, जब नदी ने हफ्तों तक शहर को जलमग्न कर दिया था. हालांकि इस बार तटबंध मजबूत रहे, फिर भी हजारों लोगों को वहां से निकालना पड़ा. तबाही का सबसे बड़ा मंजर पंजाब में देखने को मिला. भाखड़ा नांगल डैम से अतिरिक्त पानी छोड़े जाने से सतलुज नदी उफान पर है. रोपड़, लुधियाना, जालंधर और फिरोजपुर पानी-पानी हो गया. घग्गर और रावी नदियों ने इस मुसीबत को और बढ़ा दिया. 30 अगस्त तक, 1,800 से ज्यादा गांव जलमग्न हो गए थे. 2,50,000 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न हो गई और अनुमानित 9,000 करोड़ रुपये की फसलें बर्बाद हो गई.
उत्तर भारत में इस बार जल ने जो तबाई मचाई उसने बिहार और पूर्वांचल की बाढ़ को शांत कर दिया. वरना तो हर साल इन क्षेत्रों में बाढ़ टीवी और अखबार की हेडलाइन में रहती थी. हर बार की तरह गंगा और कोसी नदी का जलस्तर तो बढ़ा, लेकिन उत्तर भारत के मुकाबले बर्बादी कम हुई. बिहार आपदा विभाग के अनुसार, यह भारत का सर्वाधिक बाढ़ ग्रस्त राज्य है. यहां की कुल आबादी के 76 प्रतिशत लोग बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहते हैं. राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 73 प्रतिशत (करीब 68,800 वर्ग किमी) हिस्सा बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आता है. इस बार भी कई क्षेत्रों में बाढ़ आई.
