US डॉलर के मुकाबले रुपया 33 पैसे गिरकर ₹88.44 के निम्नतम स्तर पर बंद

डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा। भारत और अमेरिका के बीच चल रहे टैरिफ विवाद के कारण रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 36 पैसे टूटकर 88.47 (अनंतिम) के सर्वकालिक निम्न स्तर पर पहुंच गया। बाजार के जानकारों का मानना है कि यह गिरावट एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी टैरिफ के बढ़ते दबाव के कारण है। रुपये में गिरावट इस बात के संकेत हैं कि पिछले महीने से भारत पर लागू हुए अमेरिकी टैरिफ भारत में निवेशकों के विश्वास पर असर डाल रहे हैं। यही कारण है कि एशियाई समकक्षों के बीच रुपया सबसे कमजोर स्थिति में है। विदेशी निवेशकों ने इस साल अब तक भारतीय ऋण और शेयर बाजारों से 11.7 अरब डॉलर की शुद्ध निकासी की है।

पिछले शुक्रवार को रुपया 88.36 के स्तर तक चला गया था। वाशिंगटन के भारी टैरिफ ने भारत के विकास और व्यापार परिदृश्य को नुकसान पहुंचाया है और मुद्रा विनिमय की राह को धुंधला कर दिया है। इस प्रभाव को कम करने के लिए भारत सरकार ने जीएसटी की दरों को बड़े पैमाने पर कम करने का एलान किया है। हालांकि, इस बीच भारत और अमेरिका व्यापार बाधाओं को दूर करने के लिए निरंतर बातचीत करने भी विचार कर रहे हैं। निर्यातकों को ऑर्डर प्रवाह को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, आयातकों को अधिक आक्रामक तरीके से हेजिंग करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इससे मुद्रा बाजार में मांग-आपूर्ति संतुलन बिगड़ रहा है। रुपये में गिरावट की गति को कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने बार-बार हस्तक्षेप किया है। बाजार सहभागियों का कहना है कि केंद्रीय बैंक बाजार में सक्रिय रहा है।