रायपुर में आज NHM कर्मचारियों का जेल भरो आंदोलन, तूता में जुटेंगे 10 हजार कर्मी
छत्तीसगढ़ में NHM संविदा कर्मचारियों की हड़ताल को पूरे एक महीने हो गए हैं। सरकार ने 16 सितंबर तक सभी कर्मचारियों को काम पर लौटने का फाइनल अल्टीमेटम दिया था। लेकिन कर्मचारियों ने हड़ताल जारी रखा। अब सरकार ने कार्रवाई तेज कर दी है और सूरजपुर जिले में 594 कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी गई है। इससे पहले 16 सितंबर को बलौदाबाजार में 160 और कोरबा में 21 कर्मचारी नौकरी से निकाल दिए गए थे। दोनों जिलों की कार्रवाई को मिलाकर करीब 200 कर्मियों को पहले ही हटाया जा चुका था। अब सूरजपुर की बर्खास्तगी के बाद कुल संख्या 800 से ज्यादा हो चुकी है। देर रात स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने सभी जिलों के सीएमएचओ (CMHO) को निर्देश दिया कि जो कर्मचारी काम पर नहीं लौटे हैं, उन्हें व्यक्तिगत आदेश जारी कर तत्काल बर्खास्त किया जाए। साथ ही खाली पदों पर नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है।
NHM कर्मचारी संगठन अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलनरत है। इनमें से प्रमुख मांगें हैं-
संविलियन और स्थायीकरण
पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना
ग्रेड पे निर्धारण
लंबित 27% वेतन वृद्धि
CR सिस्टम में पारदर्शिता
आरक्षण, अनुकंपा नियुक्ति
मेडिकल-लीव की सुविधा
ट्रांसफर पॉलिसी
सरकार इनमें से पांच मांगों पर मौखिक सहमति जता चुकी है, लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि बिना लिखित आदेश वे आंदोलन खत्म नहीं करेंगे। सरकार केवल 5% वेतन वृद्धि देने को तैयार है, जबकि कर्मचारी 27% पर अड़े हुए हैं।स रकार की कड़ी कार्रवाई के बावजूद कर्मचारियों का विरोध तेज हो गया है। आज गुरुवार को राजधानी रायपुर में जेल भरो आंदोलन का ऐलान किया गया है। तूता धरना स्थल पर रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर संभाग के करीब 10 हजार कर्मचारी जुटेंगे। वहीं पूरे प्रदेश से 16 हजार कर्मचारी इस आंदोलन का हिस्सा बनने की तैयारी में हैं।
NHM कर्मचारियों का विरोध केवल धरना-प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने सरकार को खून से पत्र लिखे, पैरोडी गाने और डांस के जरिए भी विरोध दर्ज कराया। धमतरी में ‘मोर पथरा के देवता मानत नई हे वो’ जैसे छत्तीसगढ़ी गीत पर कर्मचारी नाचते हुए सरकार पर तंज कसते नजर आए। कुछ कर्मचारियों ने सीएम विष्णुदेव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के मुखौटे पहनकर पैरोडी गीतों पर व्यंग्यात्मक नृत्य किया।
सरकार का कहना है कि वह स्वास्थ्य सेवाओं को किसी भी कीमत पर प्रभावित नहीं होने देगी। इसी वजह से खाली पदों की सूची तैयार कर नई भर्ती का कैलेंडर तय किया जा रहा है। वहीं, कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब तक उनकी सभी मांगें लिखित आदेश में पूरी नहीं होतीं, वे हड़ताल खत्म नहीं करेंगे। स्थिति अब टकराव के चरम पर पहुंच चुकी है। एक ओर सरकार लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है, वहीं कर्मचारी आंदोलन को और तेज करने की रणनीति बना रहे हैं। आने वाले दिनों में यह टकराव प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को और गहरे संकट में डाल सकता है।
