लोकसभा में ‘VB-G RAM G’ बिल पेश, प्रियंका ने पूछा- मनरेगा से गांधी का नाम क्यों हटाया
लोकसभा में आज मंगलवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) बिल, 2025’ पेश किया। इसके बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि हम इस बिल का विरोध करते हैं। हर योजना का नाम बदलने की सनक समझ नहीं आती है। बिना चर्चा के बिना सलाह लिए विधेयक को पास न करें। इसे वापस लें। नया विधेयक पेश करें। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी मेरे परिवार के नहीं, मेरे परिवार जैसे ही हैं। पूरे देश की यही भावना है। कम से कम स्थायी समिति के पास इस बिल को भेंजे। कोई विधेयक किसी की निजी महत्वकांक्षा, सनक और पूर्वाग्रहों के आधार पेश नहीं होना चाहिए। और ना ही पास होना चाहिए।
सोमवार को संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा ने दो अहम बिल पास किए। इनमें पहला हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया (HECI) बिल है, जिसका मकसद देश में उच्च शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाना है। इस बिल के जरिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की जगह नया आयोग बनाया जाएगा, जो कॉलेज और विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता और नियमों की निगरानी करेगा। इसके अलावा एटॉमिक एनर्जी बिल भी लोकसभा से पास हुआ, जिससे परमाणु ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े नियमों को सरल बनाया जाएगा और इस सेक्टर में रिसर्च व विकास को बढ़ावा मिलेगा। सरकार का कहना है कि दोनों बिल शिक्षा और ऊर्जा क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम हैं।
प्रियंका ने कहा कि मनरेगा में 90% योगदान केंद्र देता था, अब ज्यादातर प्रदेशों में 60% आएगा। इससे राज्यों की अर्थव्यवस्था पर फर्क पड़ेगा।इससे केंद्र का नियंत्रण बढ़ाकर जिम्मेदारी घटाई जा रही है। उन्होंने कहा, ‘रोजगार तो 125 दिन होगा, लेकिन वेतन की बढ़ोतरी की बात नहीं है। हर योजना का नाम बदलने की सनक समझ नहीं आती है। बिना चर्चा के बिना सलाह लिए विधेयक को पास न करें, इसे वापिस लें, नया विधेयक पेश करें। महात्मा गांधी मेरे परिवार के नहीं, मेरे परिवार जैसे ही हैं। पूरे देश की यही भावना है। कम से कम स्थायी समिति के पास भेजे। कोई विधेयक किसी की निजी महत्वकांक्षा, सनक और पूर्वाग्रहों के आधार पेश नहीं होना चाहिए। और ना ही पास होना चाहिए।’
प्रियंका गांधी ने कहा, ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) बिल, 2025 का विरोध करती हूं। मनरेगा पिछले 20 साल से ग्रामीणों को रोजगार दे रहा है। ये जब बनाया गया था तो सदन के सभी दलों ने मंजूरी दी थी। ये क्रांतिकारी कानून है जब हम अपने लोकसभा में जाते हैं तो दूर-दूर से दिख जाता है कि कौन मनरेगा मजदूर है।’ उन्होंने कहा कि मेरा जो इस बिल पर विरोध है, जो ये कानून है, इसके तहत रोजगार की कानूनी गारंटी को मांग पर संचालित किया गया है। इस नियम में केंद्र को इजाजत दी गई है कि वे पहले से तय कर सकते हैं कि कितना पैसा क्या देना है।
पंचायती राज की मूल भावना का विरोध है नया बिल। इससे रोजगार का कानूनी रोजगार कमजोर हो रहा है। ये संविधान के विरोध में है।
