समंदर के नीचे मिला 10 हजार साल से भी पुराना शहर! ‘रहस्यमयी खंडहर’ देख वैज्ञानिकों भी हुए हैरान

जापान के समुद्र के नीचे रहस्यमयी पत्थरों से बनी संरचना मिली है. जापान के योनागुनी द्वीप के पास पानी की गहराई में सीढ़ीदार पत्थरो से बनी संरचना मिली है. जिसे कुछ लोग प्राचीन शहर के खंडहर बता रहे हैं. कुछ लोगों का कहना है कि ये संरचना 10000 साल पुरानी इंसानों द्वारा बनाई संरचना है वहीं वैज्ञानिकों का कहना है कि यह नेचुरल है. समुद्री हलचल, भूकंप और दरारों से ऐसी संरचना बनी है. जापान के समुद्र के नीचे मिला ये खंडहर अपने आम में रहस्यमयी है. साल 1987 में डाइविंग इंस्ट्रक्टर किहाचिरो अरातके ने योनागुनी द्वीप के पास जब गोता लगया तो उन्हें पानी के अंदर काफी बड़ी संरचना नजर आई. यह 50 मीटर से ज्यादा लंबी और 20 से 40 मीटर चौड़ी और 25 मीटर तक ऊंची है. पत्थरों में सीढ़िया, प्लेटफॉर्मल और शार्प कोने दिखे हैं जिसे देखकर ऐसा लगा कि यह कोई पुराना पिरामिड या फिर महल हो सकता है. भूवैज्ञानिक मासाकी किमुरा ने सालों तक इस पर अध्ययन किया. रयूक्यू यूनिवर्सिटी के किमुरा का दावा है कि यह इंसानों द्वारा बनाई गई संरचना है जो कि 10000 साल पहले समुद्र का लेवल बढ़ने से डूब गई. उनके अनुसार इसमें ड्रेनेज सिस्टम, दीवार और सड़कें हैं. मासाकी किमुरा के अनुसार यह जापानी अटलांटिस हो सकता है.

बोस्टन यूनिवर्सिटी के भूवैज्ञानिक रॉबर्ट शोच ने इसे नेचुरल बताया है. उनके अनुसार यह हिस्सा भूकंप वाला है. यहं की चट्टान में पहले से ही दरारें और सपार परतें होती है. भूकंप की वजह से चट्टानों टूटती हैं जिससे चौकोर ब्लॉक और सीढ़ियां जैसी शेप बन जाती है. समुद्र की लहरें और धाराएं इन दरारों को चौड़ा कर देती हैं वहीं सतह को चिकना बनाती हैं. साल 2024 में क्यूशू यूनिवर्सिटी के भूवैज्ञानिकों ने बोला कि कोई पुरातात्विक सबूत नहीं मिले हैं जैसे ( इंसानी बर्तन, हड्डियां और औजार आदि) ऐसे में भूवैज्ञानिकों का कहना है कि यह चट्टान से अलग होने, घिसने और गड्ढे बनने की क्रियाएं अभी भी चल रही है ऐसे में यह नेचुरल है जो कि प्राकृतिक इरोजन से हो रहा है.