आसमान में फाइटर जेट्स ने बनाया ‘ऑपरेशन सिंदूर फॉर्मेशन’, कर्तव्य पथ पर उतरे पैराट्रूपर्स और सूर्यास्त्र

भारत आज 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में अपनी विकास यात्रा, सांस्कृतिक विविधता और सैन्य ताकत की झलक दिखा रहा है. इस दौरान हाल ही में गठित नई सैन्य इकाइयों और ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल किए गए प्रमुख हथियार प्रणालियों के मॉडल भी प्रदर्शित किए जा रहे हैं. यूरोपियन काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हैं. कर्तव्य पथ पर होने वाला यह कार्यक्रम ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने की थीम पर आधारित है. इसकी अगुवाई राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की. समारोह सुबह 10.30 बजे शुरू हुआ और करीब 90 मिनट तक चलेगा.

कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय युद्ध स्मारक जाकर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देने से हुआ. इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और मुख्य अतिथि राष्ट्रपति के अंगरक्षकों की सुरक्षा में पारंपरिक बग्घी में कर्तव्य पथ पहुंचे. इस बार का खास आकर्षण भारतीय सेना का पहली बार पेश किया जा रहा ‘चरणबद्ध युद्ध संरचना’ प्रदर्शन है. इसमें ड्रोन, टैंक और तोपखाने को ऐसे युद्ध अभ्यास स्वरूप में दिखा जा रहा है, जो असली युद्ध के हालात को दर्शाता है.

कर्तव्य पथ पर भारत का पहला स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया आर्मर्ड लाइट स्पेशलिस्ट व्हीकल, हाई मोबिलिटी रिकॉनैसेंस व्हीकल (HMRV) प्रदर्शित किया गया. इसे महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स ने विकसित किया है और वर्ष 2023 में इसे सेना में शामिल किया गया था. यह वाहन अत्याधुनिक बैटलफील्ड सर्विलांस रडार से लैस है, जो जवानों, वाहनों और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले हेलिकॉप्टरों का पता लगाने में सक्षम है. इसके साथ ड्रोन, उन्नत संचार प्रणाली और एंटी-ड्रोन गन भी लगी हैं, जिससे यह छोटे दस्तों को दुश्मन की गश्ती टुकड़ियों और यहां तक कि बख्तरबंद लक्ष्यों को भी नष्ट करने में सक्षम बनाता है. भारतीय नौसेना का मार्चिंग कंटिन्जेंट भी कर्तव्य पथ पर परेड में हिस्सा लेता नजर आया.

61वीं कैवेलरी कंटिन्जेंट का नेतृत्व कैप्टन अहान कुमार ने किया. 61वीं कैवेलरी दुनिया की एकमात्र सक्रिय घुड़सवार रेजिमेंट है, जो शौर्य, घुड़सवारी और वीरता की सदियों पुरानी परंपराओं को आज भी जीवित रखे हुए है.

 

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