जज प्रमोशन नियमों में बड़ा बदलाव.. अब 7 साल की सेवा जरूरी, आरक्षण व्यवस्था में संशोधन

छत्तीसगढ़ में न्यायिक सेवा से जुड़े अधिकारियों के लिए पदोन्नति और आरक्षण व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। विधि एवं विधायी विभाग ने हायर ज्यूडिशियल सर्विस (भर्ती एवं सेवा शर्तें) नियम, 2006 में संशोधन करते हुए नई अधिसूचना जारी कर दी है। यह बदलाव हाई कोर्ट की अनुशंसा के बाद लागू किए गए हैं। विधि विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, हायर ज्यूडिशियल सर्विस से जुड़े नियमों को मौजूदा जरूरतों के अनुरूप संशोधित किया गया है। नए नियमों का उद्देश्य न्यायिक सेवा में अनुभव, गुणवत्ता और संतुलित प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता देना बताया गया है। संशोधित नियमों के तहत अब सिविल जज (जूनियर और सीनियर कैटेगरी) को हायर ज्यूडिशियल सर्विस में पदोन्नति के लिए कम से कम 7 वर्ष की सेवा पूरी करना अनिवार्य होगा। पहले यह अवधि अपेक्षाकृत कम थी।

हालांकि, किसी पद पर बने रहने की न्यूनतम समय-सीमा को 5 वर्ष से घटाकर 3 वर्ष कर दिया गया है, जिससे पदोन्नति प्रक्रिया में लचीलापन आएगा। हायर ज्यूडिशियल सर्विस में भर्ती के कोटा नियमों में भी बड़ा बदलाव किया गया है। पहले जहां भर्ती का अनुपात 65 प्रतिशत और 10 प्रतिशत निर्धारित था, उसे अब संशोधित कर 50 प्रतिशत और 25 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे विभिन्न स्रोतों से भर्ती में संतुलन बनाए रखने की कोशिश की गई है।

नए नियमों के तहत दिव्यांगजनों के लिए चार प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है, जिसमें विभिन्न श्रेणियों को शामिल किया गया है। इसके अंतर्गत दृष्टिबाधित और अल्प दृष्टि वर्ग के लिए एक प्रतिशत, श्रवण बाधित (बधिर को छोड़कर) के लिए एक प्रतिशत तथा चलने में निशक्तता, कुष्ठ रोग मुक्त व्यक्ति, बौनापन, तेजाब हमला पीड़ित और मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से पीड़ित अभ्यर्थियों के लिए एक प्रतिशत आरक्षण तय किया गया है। इस प्रावधान का उद्देश्य न्यायिक सेवा में समावेशिता को बढ़ावा देना और दिव्यांगजनों को समान अवसर उपलब्ध कराना है।

सरकार का कहना है कि इन संशोधनों से न्यायिक अधिकारियों को पर्याप्त अनुभव के बाद उच्च पदों पर जिम्मेदारी मिलेगी और साथ ही आरक्षण व्यवस्था को अधिक स्पष्ट और न्यायसंगत बनाया गया है। नए नियम लागू होने के बाद आने वाले समय में पदोन्नति और भर्ती प्रक्रिया पर इसका व्यापक असर देखने को मिलेगा।

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