कल या परसों, कब है माघ पूर्णिमा? जानें स्नान-दान की सही तिथि और शुभ मुहूर्त
हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को माघ पूर्णिमा का व्रत रखा जाता है. इस दिन स्नान, दान और श्रीहरि विष्णु की पूजा का विशेष महत्व माना गया है. मान्यता है कि माघ पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों, खासकर गंगा, यमुना, सरस्वती में स्नान करने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है. इसी दिन कल्पवास का समापन भी होता है. हालांकि, इस व्रत को लेकर लोगों में बहुत ही ज्यादा कंफ्यूजन की स्थिति बनी हुई है. कोई 1 फरवरी तो कोई 2 फरवरी को माघ पूर्णिमा बता रहा है. ऐसे में लोगों को पूर्णिमा स्नान-दान की सही तिथि की भी जानकारी नहीं है. तो जानते हैं कि माघ पूर्णिमा का स्नान-दान कब किया जाएगा.
माघ पूर्णिमा कब है?
पंचांग के मुताबिक, माघ पूर्णिमा की तिथि 1 फरवरी को सुबह 5 बजकर 52 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 2 फरवरी की सुबह 3 बजकर 38 मिनट पर होगा. ऐसे में माघ पूर्णिमा का व्रत और स्नान-दान दोनों ही 1 फरवरी यानी कल ही किया जाएगा.
ज्योतिषियों के अनुसार, पूर्णिमा का स्नान और दान दोनों ही ब्रह्म मुहूर्त में किए जाते हैं. तो ऐसे में कल माघ पूर्णिमा के स्नान-दान का मुहूर्त सुबह 5 बजकर 24 मिनट से लेकर सुबह 6 बजकर 17 मिनट तक किया जाएगा. इसी दौरान स्नान दान करने से शुभ फलों और इच्छापूर्ति की प्राप्ति होगी.
माघ पूर्णिमा के दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए. यदि पवित्र नदी में स्नान संभव न हो तो स्नान जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें. इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें. विष्णु सहस्रनाम का पाठ, पीले फूल, तुलसी दल और दीपक अर्पित करना शुभ माना जाता है. अंत में आरती कर क्षमा प्रार्थना करें.
धार्मिक मान्यता है कि माघ पूर्णिमा के दिन देवता पृथ्वी पर आते हैं और पवित्र नदियों में स्नान करते हैं. इसी कारण इस दिन संगम तट जैसे तीर्थस्थलों पर विशेष स्नान का आयोजन होता है. माघ मास में कल्पवास करने वाले श्रद्धालुओं का भी इसी दिन समापन होता है. कहा जाता है कि इस दिन श्रद्धा और नियम से किया गया स्नान-दान सौ गुना फल देता है.
