होली से पहले सावधान, मिलावटी खोवा बिगाड़ सकता है फेस्टिवल की मिठास

होली का नाम लेते ही दिमाग में रंग, उमंग और गुझिया की मिठास घुल जाती है। लेकिन अगर गुझिया में इस्तेमाल होने वाला खोवा मिलावटी निकला, तो यही मिठास बीमारी में बदल सकती है। शहर में इन दिनों खोवा की डिमांड नॉर्मल डेज की तुलना में तीन से चार गुना तक बढ़ चुकी है। अनुमान है कि 60 से 70 परसेंट लोग बाजार से मिठाई खरीदने के बजाय घर पर गुझिया बनाना पसंद करते हैं। बढ़ती डिमांड का फायदा उठाकर मिलावटखोर सक्रिय हो जाते हैं और सस्ते पदार्थ मिलाकर नकली खोवा बाजार में उतार देते हैं। होली के करीब आते ही शहर की बाजारों में खोवा की खपत तेज हो गई है। कारोबारी बताते हैं कि कई जगहों पर महीनों पहले से खोवा डीप फ्रीजर में स्टोर किया जाता है। त्योहार से पहले उसे बाहर निकालकर उसमें एसेंस, अरारोट, स्टार्च या पाउडर मिल्क मिलाकर ‘ताजा’ जैसा बनाया जाता है। कुछ मामलों में फैट निकालकर बचे अवशेष से भी खोवा तैयार किया जाता है। इससे मात्रा तो बढ़ जाती है, लेकिन गुणवत्ता और पोषण खत्म हो जाता है। खाद्य कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि बाहरी क्षेत्रों से आने वाला खोवा बिना सही जांच के स्थानीय बाजारों में पहुंच जाता है। अधिक मुनाफे के लालच में सस्ती सामग्री मिलाकर इसे बेच दिया जाता है। देखने में यह असली जैसा लगता है, लेकिन स्वाद और सेहत दोनों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।

त्योहार के मद्देनजर जिला प्रशासन और खाद्य विभाग ने संयुक्त अभियान शुरू कर दिया है। शहर में विशेष टीमें बनाकर चुपके से सैंपलिंग कर रही हैं। बाहर से आने वाले खोवा की भी जांच की जा रही है। पिछले साल होली से पहले बड़े पैमाने पर कार्रवाई करते हुए करीब 220 कुंतल मिलावटी खोवा पकड़ा गया था। 200 से ज्यादा जगहों से सैंपल लिए गए थे, जिनमें कई जगहों पर फंगस और खराब क्वालिटी पाई गई। पकड़े गए खोवा को नष्ट किया गया और संबंधित कारोबारियों पर भारी जुर्माना लगाया गया। अधिकारियों का कहना है कि इस बार भी सख्ती बरती जाएगी ताकि त्योहार के दौरान किसी की सेहत से खिलवाड़ न हो।