क्रूड ऑयल में 4 साल की सबसे बड़ी तेजी, 80 डॉलर के पार पहुंचा भाव
कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार 2 मार्च को पिछले 4 सालों की सबसे बड़ी तेजी देखने को मिली। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते जंग के हालात ने कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की कीमतों को 80 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचा दिया है। स्ट्रेट ऑफ होरमुज के जरिए ऑयल टैंकरों का आवागमन बंद होने की खबरों ने ग्लोबल स्तर पर क्रूड की सप्लाई और महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। यह समुद्री मार्ग इसलिए अहम है क्योंकि दुनिया की लगभग 20% क्रूड सप्लाई इसी रास्ते से होती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स का भाव 13% तक उछलकर 82.37 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो जनवरी 2025 के बाद का इसका सबसे उच्चतम स्तर है। बाद में यह 8.88% की बढ़त के साथ 79.34 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। वहीं, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 8% चढ़कर 72.38 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था और कारोबार के दौरान यह 75.33 डॉलर तक गया था।
पिछले दो दिनों में मिडिल ईस्ट में हुई भारी सैन्य कार्रवाई के बाद से ही ऑयल मार्केट्स में उथल-पुथल मची हुई है। इजराइल ने रविवार को ईरान पर नए हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने भी मिसाइल हमले किए। ईरानी अधिकारियों ने दावा किया कि खाड़ी तट के पास तीन तेल टैंकरों को नुकसान पहुंचा, जिसमें एक नाविक की मौत हुई। हालांकि ईरान ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होरमुज तकनीकी रूप से खुला हुआ है। इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के नौ नौसैनिक जहाजों को नष्ट कर दिया है और उन्होंने आगे भी “भारी और सटीक बमबारी” जारी रखने की बात कही है।
स्ट्रेट ऑफ होरमुज, ईरान के दक्षिणी तट के पास स्थित एक संकरा समुद्री मार्ग है। इसके जरिए सऊदी अरब, कुवैत समेत खाड़ी देशों का तेल निर्यात होता है। प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ बैरल क्रूड ऑयल और बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस इसी मार्ग से गुजरती है। जानकारों का कहना है कि अगर इस समुद्री मार्ग में लंबे समय तक बाधा रहती है, तो यह ग्लोबल लेवल पर एनर्जी क्राइसिस को जन्म दे सकता है।
तेल की कीमतों में उछाल का असर ग्लोबल शेयर बाजारों पर भी पड़ा। अमेरिका में S&P 500, नैस्डैक और डाउ जोंस के फ्यूचर्स 1% से अधिक गिर गए। ExxonMobil और Chevron जैसी एनर्जी कंपनियों के शेयरों में करीब 2% की तेजी आई। वहीं Northrop Grumman और Lockheed Martin जैसी डिफेंस कंपनियों के शेयरों में भी मजबूती देखी गई।
अमेरिका में पेट्रोल की औसत खुदरा कीमत 2.98 डॉलर प्रति गैलन दर्ज की गई, जो दिसंबर 2025 में 3 डॉलर से नीचे के स्तर के मुकाबले थोड़ा अधिक है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर कच्चा तेल महंगा बना रहा, तो ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। ईरान प्रतिदिन लगभग 33 लाख बैरल तेल का उत्पादन करता है, जो ग्लोबल उत्पादन का करीब 3% है। लेकिन स्ट्रेट ऑफ होरमुज के पास उसकी भौगोलिक स्थिति उसे रणनीतिक बढ़त देती है। OPEC के अनुसार, ईरान के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है। वह चीन और भारत जैसे देशों को बड़े पैमाने पर निर्यात करता है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता, तो कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं, जिससे महंगाई और आर्थिक ग्रोथ पर दबाव बढ़ सकता है।
