साल 1919 का वो सूर्य ग्रहण, जिसने अल्बर्ट आइंस्टीन को बना दिया महान वैज्ञानिक

अल्बर्ट आइंस्टीन आधुनिक विज्ञान के सबसे ज्यादा प्रभावशाली वैज्ञानिकों में से एक हैं. उनका जन्म 14 मार्च 1879 में जर्मनी में हुआ था. आइंस्टीन की बचपन से गणित और फिजिक्स में गहरी रुची थी. साल 1919 मई महीने में लगे सूर्य ग्रहण के बाद वह फेमस हो गए. 29 मई 1919 को सूर्य ग्रहण पड़ा था. जब ग्रहण लगा सूर्य और चंद्रमा एक सीध में आ गए. तब तक जितने तारों की जानकारी थी, उनकी तस्वीर ने साबित कर दिया था, जिसकी भविष्यवाणी आइंस्टीन ‘सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत’ कर चुके थे. भविष्यवाणी थी सूर्य का गुरुत्वाकर्षण एक लेंस की तरह काम करता है. दूर स्थित तारों से आने वाले प्रकाश को विक्षेपित कर देता है,जिसके कारण वे नई जगह पर दिखाई देते थे.

अगले कुछ महीने के अंदर अल्बर्ट आइंस्टीन का नाम दुनियाभर में फेमस हो गया. 7 नवंबर 1919 को ‘दा टाइम्स ऑफ लंदन’ में छपी खबर में विज्ञान में क्रांति, ब्रह्मांड का नया सिद्धांत, न्यूटोनियन विचारों को उखाड़ फेंका गया. जिसके बाद आइंस्टीन को लेकर रातों रात वह मशहूर हो गए. आने वाले कुछ सालों में आइंस्टीन के सिद्धांतों ने भौतिक विज्ञान को नई दिशा दी. एल्बर्ट आइंस्टीन ने कहा था कि भारी वस्तुएं प्रकाश को मोड़ सकती है. 1919 के सूर्य ग्रहण में इस सिद्धांत की जांच हुई. ब्रिटिश खगोलविद आर्थर एडिंगटन ने अफ्रीका में ग्रहण के दौरान तारों की तस्वीरें लीं. जिसमें पता चला कि तारों की रोशनी सच में सूर्य के पास मुड़ रही थी. इससे आइंस्टीन का सिद्धांत सही साबित हो गया.

आइंस्टीन को विज्ञान की दुनिया में उनके योगदान और खासकर फोटोइलेक्ट्रिक इफेक्ट के नियम की खोज के लिए आइंस्टीन को 1921 में फिजिक्स के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया. आइंस्टीन ने अपने आखिरी साल अमेरिका में गुजारे. 18 अप्रैल 1955 को आइंस्टीन ने दुनिया को अलविदा कह दिया.