तेल-गैस के बाद अब पानी पर वार… बड़े हमले हुए तो प्यास से पस्त हो जाएंगे खाड़ी मुल्क

ईरान और अमेरिका-इजरायल में जारी युद्ध के बीच अब एक नया खतरा सामने आ रहा है. इस संघर्ष में तेल और गैस के बाद अब पानी सबसे बड़ा संकट बन सकता है. खाड़ी के कई देशों की आबादी पीने के पानी के लिए समुद्री पानी को साफ करने वाली डीसैलिनेशन यानी नमक हटाने वाले प्लांट्स पर निर्भर हैं, और अब यही प्लांट्स मिसाइल या ड्रोन हमलों की जद में आ सकते हैं. इस बीच बहरीन ने इसी तरह के एक डीसैलिनेशन प्लांट पर ईरान द्वारा हमले का दावा किया है. पर्शियन गल्फ के तट पर सैकड़ों डीसैलिनेशन प्लांट लगे हुए हैं. ये प्लांट समुद्री पानी से नमक अलग करके पीने लायक पानी बनाते हैं. अगर इन प्लांट्स को नुकसान पहुंचता है तो खाड़ी के कई बड़े शहरों में पानी की भारी किल्लत हो सकती है.

खाड़ी देशों की पानी की जरूरत का बड़ा हिस्सा इसी डीसैलिनेशन तकनीक से पूरा होता है. कुवैत में करीब 90% पीने का पानी डीसैलिनेशन से आता है. ओमान में यह आंकड़ा लगभग 86% है, जबकि सऊदी अरब में करीब 70% पीने का पानी डीसैलिनेशन से तरीके से तैयार किया जाता है. इस तकनीक को रिवर्स ऑस्मोसिस कहा जाता है.

मध्य पूर्व से बाहर रहने वाले लोगों के लिए इस युद्ध की सबसे बड़ी चिंता तेल की कीमतों पर असर है, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र दुनिया के करीब एक तिहाई कच्चे तेल का निर्यात करता है, लेकिन एसोसिएटेड प्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सपर्ट्स का मानना है कि खाड़ी मुल्कों के लिए असली खतरा पानी के ढांचे को हो सकता है.

28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के साथ शुरू हुए युद्ध में पहले ही कई महत्वपूर्ण ढांचों के पास हमले हो चुके हैं. 2 मार्च को ईरान के हमलों में दुबई के जेबेल अली बंदरगाह को निशाना बनाया गया. यह हमला दुनिया के सबसे बड़े डीसैलिनेशन प्लांट्स में से एक से करीब 12 मील की दूरी पर हुआ था, जिससे दुबई को पीने का पानी मिलता है.

संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह एफ-1 पावर और वाटर कॉम्प्लेक्स और कुवैत के दोहा वेस्ट डीसैलिनेशन प्लांट के पास भी नुकसान की खबरें आई हैं. हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब तक इस बात के पक्के सबूत नहीं हैं कि ईरान ने जानबूझकर पानी के प्लांट्स को निशाना बनाया है. कई डीसैलिनेशन प्लांट पावर प्लांट्स के साथ जुड़े होते हैं. इसका मतलब यह है कि अगर बिजली ढांचे पर हमला होता है तो पानी का डीसैलिनेशन प्रोसेस भी रुक सकता है. एक्सपर्ट मानते हैं कि अगर पानी के प्लांट्स को जानबूझकर निशाना बनाया जाता है तो इससे खाड़ी मुल्क जंग में शामिल होने के लिए भी मजबूर हो सकते हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, पानी उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ एड कुलिनेन का कहना है कि डीसैलिनेशन सिस्टम कई हिस्सों पर निर्भर करता है जैसे कि इनटेक सिस्टम, ट्रीटमेंट फैसिलिटी और एनर्जी सप्लाई. अगर इनमें से किसी भी हिस्से को नुकसान पहुंचने पर पूरा सिस्टम ठप हो सकता है.