समंदर से मीठा पानी मिलेगा और बिजली भी, इस नई तकनीक से अपने द्वीपों की किस्मत बदलने जा रहा भारत
इजरायल-ईरान जंग की वजह से जहां पूरी दुनिया में उथल-पुथल महसूस की जा रही है. वहीं भारत तरक्की की राह में अपने कदम मजबूती से आगे बढ़ा रहा है. वह लक्षद्वीप में पीने के पानी और ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने के लिए आधुनिक समुद्री तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है. सरकार के इस प्रयास से टूरिज्म और समुद्री इलाकों में विकास की गति तेज होना तय माना जा रहा है. केंद्रीय विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि लक्षद्वीप द्वीप समूह में कुल 36 द्वीप हैं. ये सभी द्वीप चारों ओर अरब सागर के पानी से घिरे हुए हैं. इसके बावजूद वहां के लोगों को लंबे समय से मीठे पानी की कमी का सामना करना पड़ता रहा है. मंत्री ने बताया कि इस समस्या के निराकरण के लिए पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने कई द्वीपों पर लो-टेम्परेचर थर्मल डिसैलिनेशन प्लांट स्थापित किए हैं. यह तकनीक अरब सागर की सतह के गर्म पानी और गहरे समुद्र के ठंडे पानी के बीच प्राकृतिक तापमान अंतर का उपयोग करती है. जिससे समुद्री पानी को पीने योग्य ताजा पानी में बदल दिया जाता है.
मंत्री डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने बताया कि इस प्रक्रिया में सतह से गर्म पानी संयंत्र तक लाया जाता है. वहीं ठंडा पानी महासागर की गहराई से निकाला जाता है. इसके बाद नियंत्रित परिस्थितियों में उन्हें मिलाया जाता है. वाष्पीकरण और संघनन होता है. ऐसा करने से नमक-मुक्त मीठा जल हासिल हो जाता है. मंत्री ने बताया कि इस तरह का पहला ऐसा संयंत्र कवरत्ती में लगाया गया. इसके बाद मिनिकॉय, अगत्ती, अमिनी, कल्पेनी, कदमत, चेतलट और किल्टन समेत बाकी द्वीपों पर भी ये सुविधाएं स्थापित की गईं. मौजूदा समय में 8 द्वीपों पर इस तरह के वाटर प्लांट काम कर रहे हैं. वहीं 2 अन्य द्वीपों पर उन्हें लगाने का काम चल रहा है. इस तरह का प्रत्येक प्लांट रोजाना एक लाख लीटर साफ पानी बनाता है. जिससे अब द्वीपवासियों की पानी की समस्या काफी हद तक हल हुई है. वे लोग पहले बारिश और सीमित रूप से उपलब्ध भूजल पर ही निर्भर थे.
मंत्री ने भावी प्रोजेक्ट की जानकारी देते हुए बताया कि कवरत्ती में एक स्पेशल प्लांट लगाया जा रहा है. इस प्लांट में ओशन थर्मल एनर्जी कन्वर्जन (OTEC) तकनीक का उपयोग किया जाएगा. इसके बाद महासागर की सतह से लगभग 1000 मीटर नीचे से ठंडा पानी निकालकर उसे गर्म सतही पानी के साथ मिलाया जाएगा ऐसा करने से न केवल साफ पानी उपलब्ध होगा बल्कि बिजली भी उत्पन्न होगी.
उन्होंने बताया कि यह दुनिया का पहला ऐसा एकीकृत प्लांट होगा, जो महासागर के पानी से बिजली और पीने योग्य पानी दोनों बनाएगा. बताते चलें कि लक्षद्वीप में अभी तक बिजली का अपना कोई सोर्स नहीं बन पाया है. वह मुख्य भूमि से लाए डीजल पर निर्भर रहता है. साथ ही सोलर सिस्टम को भी बढ़ावा दिया जा रहा है.
