Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्र के पहले 3 दिन पंचक का साया, कैसे करें घटस्थापना?
चैत्र नवरात्र हिंदू धर्म का एक प्रमुख और आध्यात्मिक महत्व वाला त्योहार है. यह पर्व देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना और पूजा-अर्चना के लिए मनाया जाता है. हर साल चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्र की शुरुआत होती है . यह नौ दिनों तक चलता है. वर्ष 2026 में चैत्र नवरात्र 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक रहेगी. नवरात्र के पहले दिन की सबसे महत्वपूर्ण रस्म कलश स्थापना होती है. इसे देवी शक्ति के घर में प्रवेश का प्रतीक माना जाता है. इस दिन पूजा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है.
नवरात्र और पंचक
इस साल नवरात्र के दौरान पंचक का समय भी रहेगा. पंचक 16 मार्च 2026 की शाम 6:14 बजे से शुरू होकर 21 मार्च 2026 तक रहेगा. पंचक के समय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नए कार्य करने, विशेष रूप से आर्थिक और सामाजिक निर्णय लेने में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. सामान्य तौर पर इस समय वाहन खरीदना, नया व्यवसाय शुरू करना, गृह प्रवेश या विवाह जैसी योजनाओं को टालना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि पंचक में किए गए कार्यों में बाधा आती है या उनका फल अपेक्षित रूप से नहीं मिलता.
हालांकि, नवरात्र जैसी नियत तिथि वाले धार्मिक कार्यों पर पंचक का प्रभाव नहीं माना जाता. इसलिए नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना करना पूरी तरह से शुभ और शास्त्रसम्मत है. इस दिन किए जाने वाले पूजा-अर्चना और व्रत से जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और सौभाग्य की वृद्धि होती है.
इस वर्ष नवरात्रि की शुरुआत और उसके शुरुआती तीन दिन पंचक में पड़ रहे हैं. इसलिए इन दिनों में धार्मिक कार्यों को छोड़कर अन्य शुभ कार्यों जैसे वाहन खरीदना, नए व्यवसाय की शुरुआत करना, गृह प्रवेश, विवाह या मुंडन जैसी रस्मों को टालना चाहिए. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पंचक में किए गए ये कार्य सफल नहीं होते या उनमें बाधाएं आती हैं.
नवरात्र पूजा की विशेषताएं
नवरात्र के नौ दिनों में माता दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. लोग व्रत रखते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं, भजन-कीर्तन और कथा पाठ करते हैं. नवरात्र के इन दिनों में श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा से जीवन में मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है. इस प्रकार, नवरात्र धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है. पंचक के बावजूद कलश स्थापना और पूजा करना पूरी तरह से शुभ माना जाता है.
