जमीन के 6,000 फीट नीचे मिला सोने का खजाना!
दुनियाभर के गोल्ड मार्केट में हलचल मचा देने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है. भारत के पड़ोसी मुल्क चीन में एक ऐसा सोने का भंडार मिलने का दावा किया गया है, जिसे सुनकर एक्सपर्ट भी हैरान रह गए हैं. कहा जा रहा है कि यह सिर्फ एक खदान नहीं बल्कि चीन के लिए कुबेर का खजाना साबित हो सकता है. चीन के हुनान प्रांत के वांगू गोल्ड फील्ड में मिले इस सोने के भंडार की अनुमानित कीमत लगभग 83 अरब डॉलर बताई जा रही है, वहीं इसकी कुल मात्रा 1,100 टन तक पहुंच सकती है. अगर ये आंकड़े सही साबित होते हैं तो यह खोज दुनिया के गोल्ड इतिहास को बदल सकती है. चीन के हुनान प्रांत के भूवैज्ञानिक ब्यूरो ने पिंगजियांग काउंटी में वांगु गोल्ड फील्ड के नीचे इस भंडार की पुष्टि की है. ड्रिलिंग के दौरान 65 किलोमीटर से ज्यादा लंबी चट्टानों की जांच की गई जिसमें सोने की 40 से ज्यादा नसें यानी veins मिली हैं. जानकारों का कहना है कि करीब 6,560 फीट की गहराई पर 300 मीट्रिक टन सोना पहले ही कंफर्म हो गया है. लेकिन आधुनिक 3D जियोलॉजिकल मॉडलिंग के मुताबिक 9,840 फीट की गहराई तक जाने पर यह भंडार 1,000 मीट्रिक टन यानी करीब 1,100 टन से ज्यादा हो सकता है.
क्यों खास है यह खोज?
इस खोज की सबसे चौंकाने वाली बात है इसकी क्वालिटी.
ड्रिलिंग में निकले पत्थरों में सीधे तौर पर सोना चमकता हुआ दिखाई दिया है जो बहुत ही कीमती है.
ज्यादातर एक टन अयस्क से 1 से 5 ग्राम सोना निकलता है लेकिन यहां कुछ नमूनों में प्रति टन 138 ग्राम सोना मिला है.
अयस्क जितना समृद्ध होगा उसे रिफाइन करने का खर्च उतना ही कम आता है जिससे मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है.
नेचर जियोसाइंस की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस तरह के भारी जमाव के पीछे एक दिलचस्प वैज्ञानिक कारण हो सकता है. रिसर्चर्स का मानना है कि भूकंपीय तनाव के दौरान क्वार्ट्ज चट्टानों में पीजोइलेक्ट्रिसिटी यानी बिजली पैदा होती है जिससे गर्म तरल पदार्थों से सोना तेजी से अलग होकर जमा होने लगता है.
अगर 1,000 टन के इस अनुमान की पुष्टि हो जाती है तो यह दक्षिण अफ्रीका की साउथ डीप खदान को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे बड़ा सोने का भंडार बन जाएगा. वर्तमान में इसकी कीमत करीब 83 अरब डॉलर आंकी गई है. हालांकि जानकारों का कहना है कि इस खदान से सोना बाहर आने में अभी 10 से 20 साल का समय लगेगा. अभी यह प्रोजेक्ट खोज के चरण में है और इसके अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतरने का इंतजार है.
