ब्रह्मांड का सबसे खूबसूरत नजारा! जेम्स वेब टेलिस्कोप ने खींची अद्भुत तस्वीरें
आम तौर पर हम शनि को पीले या सुनहरे रंग का देखते हैं, लेकिन जेम्स वेब टेलीस्कोप की तस्वीरों में यह बिल्कुल अलग है. इसका कारण वैज्ञानिक इन्फ्रारेड वेवलेंथ को मानते हैं. क्योंकि शनि के वायुमंडल में मौजूद मीथेन गैस सूरज की रोशनी को सोख लेती है, जिससे ग्रह का मुख्य हिस्सा काला या गहरे रंग का दिखाई देता है. वहीं, शनि के छल्ले मुख्य रूप से बर्फ के टुकड़ों और चट्टानों से बने हैं. ये बर्फ के कण इन्फ्रारेड रोशनी को सोखने के बजाय उसे वापस फेंकते हैं, जिससे वे अंधेरे अंतरिक्ष में चमकते हुए दिखाई दे रहे हैं. यह नजारा ऐसा है मानो अंधेरे कमरे में कोई हीरों का हार चमक रहा हो.
वैज्ञानिकों ने इन तस्वीरों के जरिए शनि के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों (Poles) का बारीकी से अध्ययन किया है. जिसके बाद उन्होंने पाया कि पृथ्वी की तरह शनि पर भी मौसम बदलता है, लेकिन वहां एक मौसम कई सालों तक चलता है. तस्वीरों से पता चला है कि शनि के उत्तरी गोलार्ध में अब ‘गर्मियों’ का अंत हो रहा है. वहीं, वायुमंडल की ऊपरी परतों में गहरे रंग की धुंध (Haze) देखी गई है, जो मौसमी बदलावों के कारण अपनी जगह बदल रही है.इन तस्वीरों में आपको केवल शनि ही नहीं, बल्कि उसके कुछ छोटे चंद्रमा भी टिमटिमाते हुए दिख रहे होंगे. वैज्ञानिकों के लिए यह डेटा बहुत कीमती है क्योंकि इससे वे शनि के वायुमंडल की गहराई और उसके छल्लों की उम्र का सटीक अंदाजा लगा पाएंगे.
इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि शनि जैसे गैस जायंट (Gas Giant) ग्रहों पर हवाएं और तूफान कैसे काम करते हैं. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इन तस्वीरों से यह पता चल पाएगा कि शनि की रिंग्स कितनी पुरानी हैं और क्या वे आने वाले समय में कभी गायब हो सकती हैं. साथ ही इन्फ्रारेड डेटा से वैज्ञानिक यह समझ पाएंगे कि शनि के बादलों के नीचे कौन सी गैसें और रासायनिक प्रक्रियाएं चल रही हैं.
हबल टेलीस्कोप हमें वह दिखाता है जो हमारी आंखें देख सकती हैं (Visible Light), लेकिन जेम्स वेब उस गर्मी और रोशनी को पकड़ता है जो छिपी हुई है. यही कारण है कि जहां हबल में शनि एक शांत ग्रह दिखता है, वहीं वेब की तस्वीरों में यह एक सक्रिय और गतिशील दुनिया नजर आता है.
