जमीन विवाद में घिरे सोनाली बेंद्रे के पति गोल्डी बहल, लगा धोखाधड़ी का आरोप
महाराष्ट्र के पुणे से एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें बॉलीवुड की फेमस एक्ट्रेस सोनाली बेंद्रे के पति और फिल्ममेकर गोल्डी बहल कानूनी पचड़े में फंसते नजर आ रहे हैं. पुणे के मावल स्थित वडगांव दीवानी अदालत में गोल्डी बहल के खिलाफ जमीन विवाद को लेकर मामला दर्ज किया गया है. यह विवाद करीब 30 गुंठा जमीन (करीब 1 एकड़) के मालिकाना हक और ‘कुल’ (बटाईदार/काश्तकार) अधिकारों से जुड़ा है. स्थानीय निवासी चंद्रकांत बालू शिंदे ने आरोप लगाया है कि गोल्डी बहल ने जो जमीन खरीदी है, उस पर उनके परिवार का पुश्तैनी अधिकार है और इस सौदे में कानूनी तथ्यों को छिपाया गया है.
इस कानूनी लड़ाई की शुरुआत चंद्रकांत बालू शिंदे की शिकायत से हुई है. शिंदे का दावा है कि विवादित जमीन पर 1 अप्रैल 1957 से उनके दादा केसू बाबाजी शिंदे का नाम दर्ज है और उनके पास इस जमीन के ‘कुल’ (Tenancy rights) अधिकार थे. शिंदे का आरोप है कि मूल जमीन मालिक ने धोखाधड़ी करते हुए पहले इस जमीन को बाला शिंदे नामक व्यक्ति को बेचा और फिर चालाकी से ‘कुल’ अधिकारों की जानकारी छिपाकर इसे गोल्डी बहल के नाम कर दिया. उनका कहना है कि सरकारी कागजों में हेरफेर करके उनके परिवार को उनके हक से वंचित करने की कोशिश की गई है.
शिकायतकर्ता के वकील वनराज शिंदे ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि केवल खरीद-फरोख्त के कागजात तैयार कर लेने या 7/12 (जमीन का रिकॉर्ड) पर नाम चढ़ा लेने से कोई असली मालिक नहीं बन जाता. उन्होंने तर्क दिया कि ‘कुल’ कानून के तहत जो अधिकार उनके क्लाइंट के परिवार को मिले थे, उन्हें दरकिनार कर यह सौदा किया गया है, जो पूरी तरह गैरकानूनी है.
शिकायत में केवल जमीन के कागजों की ही बात नहीं है, बल्कि व्यक्तिगत विवाद का भी जिक्र है. चंद्रकांत शिंदे ने आरोप लगाया है कि दिसंबर 2025 में जब सोनाली बेंद्रे और गोल्डी बहल मौके पर आए थे, तब वहां विवाद हुआ था. शिंदे का कहना है कि उस दौरान गोल्डी बहल और उनके लोगों ने उनके और उनकी बुजुर्ग मां के साथ विवाद और धक्का-मुक्की की थी. इस घटना के बाद से ही शिंदे परिवार ने कानूनी रास्ता अपनाने का फैसला किया और मामला अदालत तक पहुंच गया.
दूसरी तरफ, गोल्डी बहल के वकील राजू शिंदे ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे ब्लैकमेलिंग का हिस्सा बताया है. उनका कहना है कि साल 1965 में ही मावल तहसीलदार ने एक आदेश जारी किया था, जिसमें स्पष्ट था कि केसू शिंदे (शिकायतकर्ता के दादा) इस जमीन के मालिक नहीं हैं. बचाव पक्ष का दावा है कि इस आदेश पर केसू शिंदे के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं. वकील का कहना है कि शिकायतकर्ता पहले भी तहसीलदार और एसडीओ (SDO) के पास हार चुके हैं और अब केवल पैसे ऐंठने के लिए सेलिब्रिटी का नाम इस्तेमाल कर रहे हैं.
फिलहाल यह मामला पुणे की वडगांव मावल अदालत में विचाराधीन है. एक तरफ जहां शिंदे परिवार अपने पुश्तैनी हक की दुहाई दे रहा है, वहीं गोल्डी बहल का पक्ष इसे एक कानूनी तौर पर वैध सौदा बता रहा है. चूंकि मामला एक नामी फिल्मी हस्ती के परिवार से जुड़ा है, इसलिए स्थानीय प्रशासन और मीडिया की भी इस पर नजर है.
