भगवान के माता-पिता बनने के लिए लगी लाइन! खंडवा की इस अनोखी परंपरा में लाखों की लग रही बोली

खंडवा शहर में इन दिनों एक ऐसी परंपरा चर्चा में है, जिसे सुनकर कोई भी चौंक जाए. यहां लोग भगवान के “माता-पिता” बनने के लिए लाइन में लगे हैं. ये कोई मजाक नहीं, बल्कि जैन समाज की एक बेहद पवित्र और खास परंपरा है, जिसे पाने के लिए लोग सालों तक इंतजार करते हैं. बजरंग चौक स्थित 45 साल पुराने महावीर दिगंबर जैन मंदिर में पांच दिवसीय पंचकल्याणक महोत्सव होने जा रहा है. यह आयोजन मुनिश्री आदित्य सागर महाराज के सानिध्य में होगा. इस दौरान भगवान की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की जाती है और उन्हें पूजनीय स्वरूप में स्थापित किया जाता है.

इस आयोजन की सबसे खास बात यही है कि इसमें श्रद्धालुओं को भगवान के माता-पिता बनने का अवसर मिलता है. इसके लिए पर्ची और बोली के जरिए चयन किया जाता है. कई लोग पहले से इच्छा जताते हैं, लेकिन अंतिम फैसला परंपरा और गुरु के अनुसार होता है.

इस मौके के लिए कई बार लाखों रुपये तक की बोली लगाई जाती है. लेकिन समाज के लोग मानते हैं कि यह सिर्फ पैसे का नहीं, बल्कि आस्था और त्याग का विषय है. इस भूमिका को निभाने के लिए व्यक्ति को अपने जीवन में कई बदलाव करने पड़ते हैं.
समाज की नीता अमर लुहाड़िया और सचिव सुनील जैन के मुताबिक, यह जैन समाज का सबसे बड़ा आयोजन है और खंडवा में चौथी बार हो रहा है. पूरे निमाड़ क्षेत्र में इसे लेकर जबरदस्त उत्साह है और लोग बढ़-चढ़कर इसमें भाग ले रहे हैं.

इस आयोजन में भगवान के जीवन के पांच प्रमुख कल्याणकों का वर्णन होता है. साथ ही इंद्र-इंद्राणी बनने का भी मौका मिलता है. यह परंपरा सालों से चली आ रही है और लोगों के लिए इसे पाना किसी बड़े सौभाग्य से कम नहीं माना जाता.