फेक CBI अफसर बनकर रिटायर्ड शिक्षक से 23 लाख ठगे, मनी लॉन्ड्रिंग-डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया, 12 किस्तों में डलवाई रकम
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में रिटायर्ड शिक्षक से 23 लाख रुपए की ठगी की गई है। ठगों ने खुद को CBI अधिकारी बताया और मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने, डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 6 किश्तों में पैसे ट्रांसफर करवा लिए। 6 दिनों बाद पीड़ित के बेटे ने मामले की शिकायत पुलिस में की। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ठगों के बैंक खाते में जमा 17 लाख रुपए से अधिक की राशि होल्ड कराई है। इस मामले में पुलिस ने कर्नाटक के बेंगलुरू से बुधवार को 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि मास्टरमाइंड फरार चल रहा है। पूछताछ में पता चला कि ठगी का नेटवर्क कर्नाटक सहित दुबई से भी संचालित हो रहा था। गिरोह डिजिटल अरेस्ट, आधार/सिम लिंकिंग, क्रिप्टो निवेश और फर्जी लोन ऐप्स के जरिए ठगी करता था। मामला पुसौर थाना क्षेत्र का है। दरअसल, ग्राम जतरी के रहने वाले गरूण सिंह पटेल (72) रिटायर्ड शिक्षक हैं। 10 अक्टूबर 2025 को उन्हें तीन अलग-अलग मोबाइल नंबरों से कॉल आया। कॉल करने वालों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर कहा कि मुंबई में उनके नाम से खाता खोल गया है और उनकी जांच की जाएगी। ठगों ने रिटायर्ड शिक्षक से जांच में सहयोग करने की कही। साथ ही यह भी कहा कि इन सभी बातों को गोपनीय रखना है नहीं तो अरेस्ट कर मुंबई ले आएंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी होने के बाद राशि वापस कर दी जाएगी।
इस भरोसे में आकर रिटायर्ड शिक्षक ने 25 से 29 अक्टूबर 2025 के बीच यूपीआई, पेटीएम और आरटीजीएस के जरिए 12 किस्तों में कुल 23,28,770 रुपए ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद उन्होंने वॉट्सएप के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने की धमकी दी।
ऐसे में 30 अक्टूबर 2025 को रिटायर्ड शिक्षक ने मामले की जानकरी अपने छोटे बेटे को दी। इसके बाद बेटे ने फौरन पुसौर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अज्ञात मोबाइल नंबर धारकों के खिलाफ धारा 418, 66(D) आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की।
पुसौर पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की। जांच में पीड़ित के सेंट्रल बैंक से किए गए लेन-देन, संदिग्ध यूपीआई आईडी, एनईएफटी और आरटीजीएस, आरोपियों के मोबाइल नंबर और बैंक खातों का KYC डिटेल इकट्ठा किया गया। गहन जांच के बाद यह जानकारी मिली कि आरोपियों का ठिकाना बेंगलुरू में है। पुलिस टीम फौरन बेंगलुरू के लिए रवाना हुई। पुलिस टीम ने स्थानीय पुलिस की मदद से आरोपियों का पता लगाया, जिसके बाद विग्नेश प्रकाश (29) और स्टीफन थॉमस (54) को अलग-अलग जगहों से अरेस्ट किया। इनके खातों में पीड़ित के खाते से ट्रांसफर की गई राशि मिली।
पुलिस ने दोनों आरोपियों को बेंगलुरू न्यायालय में पेश कर ट्रांजिट रिमांड पर लिया और रायगढ़ लेकर पहुंची। पूछताछ में पता चला कि दोनों आरोपी लेबर एजेंट है, जिसकी दुबई में फिरोज खान उर्फ डॉम्निक से मुलाकात हुई थी। विग्नेश ने बताया कि फिरोज खान पहले बेंगलुरू में रहता था और पिछले कई सालों से दुबई में रह रहा है।
वह दुबई में वीजा से जुड़ा काम करता है और भारत सहित अन्य देशों से आने वाले लोगों के दस्तावेज लेकर उनका मिसयूज करता है। विग्नेश पी. फिरोज के लिए लेबर की व्यवस्था कर लोगों को दुबई भेजता था, लेकिन उनका काम साइबर फ्रॉड से जुड़ा हुआ है। फिरोज खान अपने साथियों के साथ मिलकर डिजिटल अरेस्ट, आधार/सिम लिंकिंग, क्रिप्टो निवेश और फर्जी लोन ऐप्स के जरिए देशभर में ठगी करता था। वह विग्नेश पी. और स्टीफन थॉमस जैसे लोगों को गिरोह में शामिल कर ठगी की रकम अपने खातों में मंगवाता था, जिसके बदले उन्हें कमीशन दिया जाता था।
शुरुआती जांच में पता चला कि पीड़ित गरुण पटेल ने विग्नेश पी. के खाते में 4 लाख 20 हजार रुपए भेजे थे। विग्नेश के बैंक खाते में 17 लाख रुपए से ज्यादा रकम मिली, जिसे पुलिस ने रोक (होल्ड) दिया है। वहीं स्टीफन थॉमस ने करीब 6 लाख रुपए लेने और फिरोज के कहने पर उस रकम को दूसरे खातों में भेजने की बात स्वीकार की है। आरोपी विग्नेश पी और स्टीफन थॉमस से दो मोबाइल जब्त कर कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
