शराब नीति मामला : केजरीवाल हाईकोर्ट में आज खुद रखेंगे पक्ष, जस्टिस स्वर्ण कांता को केस से अलग करने की मांग

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) संयोजक अरविंद केजरीवाल सोमवार को शराब घोटाले मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में खुद अपनी दलील रख सकते हैं। यह मामला CBI की उस याचिका पर से जुड़ा है, जिसमें ट्रायल कोर्ट से केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों को राहत देने के आदेश को चुनौती दी गई है।
रविवार को केजरीवाल और अन्य 22 पूर्व आरोपियों ने इस मामले की सुनवाई कर रहीं जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को मामले से अलग (रिक्यूज) करने की मांग की थी। आरोपियों ने मामले को दूसरी बेंच में ट्रांसफर करने की अपील की थी। हालांकि इसे यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि रिक्यूजल का निर्णय संबंधित जज ही लेता है। रिक्यूजल का मतलब होता है कि कोई जज संभावित हितों के टकराव, पक्षपात या निष्पक्षता पर सवाल उठने की स्थिति में खुद को मामले की सुनवाई से अलग कर ले। 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में केजरीवाल सहित सभी 23 आरोपियों को राहत दे दी थी। ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में CBI की जांच की कड़ी आलोचना भी की थी।

ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ CBI की याचिका पर जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सुनवाई की थी। उन्होंने 9 मार्च को कहा था प्राइमा फेसी (पहली नजर में) ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां गलत लगती हैं और उन पर विचार जरूरी है। साथ ही, जस्टिस शर्मा की बेंच ने ट्रायल कोर्ट की ओर से CBI के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश पर भी रोक लगा दी थी।

इसके बाद केजरीवाल ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय को लेटर लिखकर जज बदलने की मांग की और कहा कि ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ टिप्पणी करने का कोई स्पष्ट कारण दर्ज नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि जस्टिस शर्मा पहले इस मामले में कई आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर चुकी हैं, जबकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें राहत दी। हालांकि, हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पहले ही केजरीवाल की यह मांग खारिज कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि खुद जज ही तय करेंगे कि उन्हें सुनवाई से अलग होना है या नहीं। इसके बाद केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा की टिप्पणियों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अलग से विशेष अनुमति याचिका (SLP) भी दाखिल की है।

दिल्ली सरकार ने 2021 में राजस्व बढ़ाने और शराब व्यापार में सुधार के लिए आबकारी नीति बनाई थी, जिसे बाद में अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद वापस ले लिया गया। इसके बाद उपराज्यपाल विनय सक्सेना ने CBI जांच के आदेश दिए थे। CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि इस नीति के जरिए निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया और इसमें भ्रष्टाचार हुआ। इस मामले में केजरीवाल को 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान गिरफ्तार कर हिरासत में भेजा गया था। उन्हें 156 दिन की हिरासत के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। वहीं सिसोदिया इस मामले में 530 दिन तक जेल में रहे।