अपनी जरूरत पर मकान-दुकान खाली करा सकता है मालिक, किराएदारों के लिए हाई कोर्ट का आदेश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि मकान मालिक निजी जरूरत के कारण अपना मकान या दुकान खाली कराना चाहता है, तो उसकी जरूरत की वास्तविकता या सदाशयता का परीक्षण नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि मकान मालिक को केवल यह साबित करना होगा कि अपने इस्तेमाल के लिए उस जगह की उसे आवश्यकता है, चाहे उसी रूप में या गिराकर। ऐसे में किराएदार यह नहीं कह सकता कि मकान मालिक के पास वैकल्पिक स्थान है, इसलिए वह किराएदारी समाप्त नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा कि इसकी जांच नहीं की जा सकती कि जरूरत कितनी अधिक, कितनी जरूरी या कितनी वास्तविक है, किराएदार को दुकान खाली करनी होगी। इसी के साथ कोर्ट ने याची किराएदार की बेदखली के रेंट कंट्रोल अथारिटी व अधिकरण के आदेश पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। मामले के तथ्यों के अनुसार कानपुर नगर के गांधी नगर में याची दुकान का किराएदार है।
मकान मालिक ने निजी व्यवसाय बढ़ाने की जरूरत बताते हुए याची को दुकान खाली करने का नोटिस दिया और रेंट अथारिटी के समक्ष दुकान खाली कराने की अर्जी दी। याची का कहना था कि मकान मालिक के पास अन्य स्थान उपलब्ध है, जहां वह गोदाम बना सकता है । उसकी जरूरत वह दुकान खाली कराए बिना पूरी हो सकती है, जिससे उसका जीवन यापन हो रहा है। लेकिन अथॉरिटी ने बेदखल करने का आदेश दिया है। अपील भी खारिज हो गई। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी, लेकिन याची को दुकान खाली करने के लिए आठ महीने का समय देते हुए अथारिटी के समक्ष इस बात की अंडरटेकिंग देने का निर्देश दिया है।
