शिमला राम मंदिर में मुस्लिम निकाह.. हिंदू संगठनों ने किया विरोध

हिमाचल प्रदेश के शिमला के राम बाजार में स्थित राम मंदिर काफी पुराना मंदिर है। इसी मंदिर में इस्लामिक निकाह होने जा रहा है। इसके बाद बवाल खड़ा हो गया है। हिन्दू संगठनों ने इसका विरोध किया है। मामला कुछ यूं है कि यह प्राचीन मंदिर बहुमंजिला है। इसकी ऊपरी मंजिल पर राम, लक्ष्मण, सीता और हनुमान जी की मूर्तियां हैं, जबकि नीचे की मंजिलों में हॉल बने हैं जो शादियों और सामाजिक कार्यक्रमों के लिए इस्तेमाल होते हैं। इस मंदिर की देखभाल और प्रबंधन सूद सभा करती है। हाल ही में एक मुस्लिम परिवार ने 11 अप्रैल को इस हॉल में अपनी बेटी का निकाह करने के लिए बुकिंग कराई। परिवार ईदगाह कॉलोनी का रहने वाला है। जैसे ही यह बात सामने आई, हिंदू संगठनों में नाराजगी फैल गई।

हिंदू संघर्ष समिति ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि मंदिर की संपत्ति को धार्मिक परंपराओं के खिलाफ इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। समिति ने सूद सभा को ज्ञापन सौंपा और मांग की कि निकाह की बुकिंग रद्द की जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो सड़कों पर प्रदर्शन करने की चेतावनी दी गई। उन्होंने संकेत दिया कि प्रतीकात्मक विरोध कार्यक्रम भी हो सकते हैं। सूद सभा ने इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार किया। सोमवार को या मंगलवार को उनकी इमरजेंसी मीटिंग बुलाई गई।

सभा के चेयरमैन राजीव सूद ने कहा कि वे सभी समुदायों की भावनाओं का सम्मान करते हैं। कोई भी फैसला सोच-समझकर और संवैधानिक तरीके से लिया जाएगा। राजीव सूद ने यह भी बताया कि पिछले पांच सालों में इस हॉल में 15 से ज्यादा मुस्लिम परिवारों ने निकाह किया है। हॉल में कुछ नियम हैं – मांस, मछली और शराब की मनाही है, ताकि धार्मिक माहौल बना रहे।

यह विवाद शिमला के हाल के संजौली मस्जिद विवाद के बाद आया है, जिसने शहर में पहले से ही चर्चा पैदा की हुई है। इससे पहले अक्टूबर 2024 में भी राम मंदिर में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के आने पर विवाद हुआ था, जब उन्होंने साईं बाबा की मूर्ति देखकर कार्यक्रम बहिष्कार कर दिया था।

अभी तक कोई सड़क पर प्रदर्शन नहीं हुआ है, लेकिन मुद्दा स्थानीय स्तर पर काफी चर्चा में है। हिंदू संगठन मंदिर की परंपरा बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं, जबकि सूद सभा दोनों पक्षों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए फैसला लेने की बात कह रही है।