ये है भारत का Love Marriage Capital! हर हीर को मिल जाता है रांझा, परिवार भी करता है सपोर्ट
भारत में आज भी ज्यादातर शादियां अरेंज्ड होती हैं और लव मैरिज को कई परिवार टैबू समझते हैं. अगर दो लोगों को आपस में प्यार है और उनकी कास्ट अलग है तो आज भी अधिकांश परिवार वाले शादी को राजी नहीं होते. भारत के कई राज्यों में तो लव मैरिज करने पर परिवार वाले जान के दुश्मन भी बन जाते हैं. लेकिन देश के उत्तर-पूर्व में एक ऐसा राज्य है जहां लव मैरिज ना सिर्फ आम है, बल्कि परिवार भी इसे खुशी-खुशी सपोर्ट करता है. हम बात कर रहे हैं हम बात कर रहे हैं मिजोरम की, जहां ज्यादातर कपल लव मैरिज ही करते हैं.
मिजोरम में इंटर-कास्ट और लव मैरिज की दर पूरे भारत में सबसे ज्यादा है. राष्ट्रीय स्तर पर भारत में सिर्फ 5% शादियां इंटर-कास्ट होती हैं, जबकि मिजोरम में यह आंकड़ा 55% तक पहुंचता है. कई सर्वे और रिपोर्ट्स में मिजोरम को लव मैरिज के मामले में नंबर-1 बताया गया है. यहां लड़का-लड़की खुद अपना साथी चुनते हैं, परिवार विरोध की बजाय सलाह और आशीर्वाद देता है.
मिजोरम मुख्य रूप से ईसाई बहुल राज्य है. ईसाई संस्कृति में व्यक्तिगत पसंद को ज्यादा महत्व दिया जाता है. मिजो समाज में महिलाओं की स्थिति भी मजबूत है. हालांकि पूर्ण मातृसत्तात्मक नहीं, लेकिन महिलाओं को परिवार और समाज में अच्छा दर्जा मिलता है. लड़कियां पढ़ती हैं, नौकरी करती हैं और अपनी जिंदगी के फैसले खुद लेती हैं. यहां “हीर-रांझा” वाली कहानी सच होती दिखती है. लड़का-लड़की स्कूल, कॉलेज या काम के दौरान एक-दूसरे से प्यार करते हैं और परिवार को बताते हैं. ज्यादातर मामलों में परिवार सहमत हो जाता है. अगर कोई छोटी-मोटी आपत्ति होती है तो चर्च या परिवार के बुजुर्ग सलाह देकर मामला सुलझा देते हैं.
हालांकि, एक फैक्ट ये है कि यहां डिवोर्स रेट भी अन्य राज्यों की तुलना में ज्यादा है, लेकिन इसका कारण महिलाओं की स्वतंत्रता और जागरूकता को माना जाता है. मिजोरम में महिलाएं घर की मुखिया की भूमिका निभाती हैं. वे फैसले लेने में बराबर की भागीदार होती हैं. लड़कियों की शिक्षा और स्वावलंबन पर खास ध्यान दिया जाता है. इसी वजह से लव मैरिज में लड़की की राय सबसे ज्यादा मायने रखती है. सोशल मीडिया और सर्वे रिपोर्ट्स में मिजोरम को बार-बार “लव मैरिज कैपिटल” जैसे नामों से पुकारा जाता है.
