कुदरत ने इस जीव को अनोखे तरीके से किया है तैयार
दुनिया तरह-तरह के अनोखे जीवों से भरी हुई है, जिनकी बनावट और जीवन जीने के तरीके हमें हैरान कर देते हैं. इन्हीं में से एक दिलचस्प जीव है टिड्डा, जिसे हम अक्सर बरसात के मौसम में इधर-उधर कूदते हुए देख लेते हैं. देखने में साधारण सा लगने वाला यह हरे रंग का कीट अपनी शारीरिक रचना के कारण काफी खास होता है. इसकी सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इसके कान सिर पर नहीं, बल्कि पेट के हिस्से में होते हैं. टिड्डे की यह अनोखी बनावट केवल दिखने भर की खासियत नहीं है, बल्कि इसके जीवन और सुरक्षा से गहराई से जुड़ी हुई है. प्रकृति ने इसे इस तरह विकसित किया है कि यह अपने आसपास के वातावरण के अनुसार खुद को बेहतर ढंग से ढाल सके और खतरों से समय रहते बच सके. दरअसल, टिड्डे के पेट के पहले खंड के दोनों ओर एक बेहद पतली झिल्ली होती है, जिसे टिम्पैनल अंग (Tympanal Organ) कहा जाता है. यही झिल्ली उसके सुनने का मुख्य माध्यम होती है. जब आसपास से ध्वनि तरंगें आती हैं और इन झिल्लियों से टकराती हैं, तो उनमें हल्का कंपन पैदा होता है. यही कंपन टिड्डे के शरीर में संकेत के रूप में पहुंचता है, जिससे वह आवाज को पहचान पाता है.यह प्रक्रिया इंसानों के कानों से थोड़ी अलग जरूर है, लेकिन काम लगभग वही करती है…आवाज को पकड़ना और उसे समझना. फर्क सिर्फ इतना है कि जहां इंसानों के कान सिर पर होते हैं, वहीं टिड्डे ने अपने पेट को ही सुनने का सेंटर बना लिया है.
टिड्डे के पेट में मौजूद ये सुनने वाले अंग हवा से भरे छोटे-छोटे थैलों यानी एयर सैक्स (Air Sacs) से जुड़े होते हैं. ये थैले ध्वनि को और अधिक स्पष्ट रूप से महसूस करने में मदद करते हैं. इसी वजह से टिड्डा हल्की-सी आहट या कंपन को भी जल्दी पकड़ लेता है. यह क्षमता उसके लिए जीवन रक्षक साबित होती है, क्योंकि इससे वह पक्षियों या अन्य शिकारियों के हमले से पहले ही सतर्क हो जाता है.
एक और दिलचस्प बात यह है कि टिड्डे के ये कान सीधे दिखाई नहीं देते. ये उसके पंखों के नीचे सुरक्षित रूप से छिपे रहते हैं. पंख इन नाजुक झिल्लियों को बाहरी चोट, धूल या गंदगी से बचाने का काम करते हैं. साथ ही, यह स्थान ध्वनि को पकड़ने के लिए भी काफी उपयुक्त होता है, क्योंकि यहां पर बाहरी व्यवधान कम होता है. प्रकृति ने टिड्डे को इस तरह डिजाइन किया है कि वह अपने वातावरण में आसानी से जीवित रह सके. पेट पर कान होने की वजह से वह हर दिशा से आने वाली आवाजों को बेहतर तरीके से महसूस कर सकता है. इससे उसे अपने आसपास के खतरों का अंदाजा जल्दी लग जाता है और वह तुरंत प्रतिक्रिया दे सकता है, जैसे अचानक छलांग लगाकर दूर भाग जाना.
