बेतिया के पूर्व असिस्टेंट इंजीनियर की संपत्ति 295 प्रतिशत अधिक,अब 34.27 लाख रुपए आय से अधिक संपत्ति का दूसरा केस दर्ज
पटना : बेतिया के पूर्व असिस्टेंट इंजीनियर रौशन कुमार घूस लेने के आरोप में जेल में बंद हैं। इधर, उनकी संपत्ति उनकी सरकारी सैलरी से 295 प्रतिशत अधिक मिली है। इस वजह से रौशन कुमार की मुसिबत और अधिक बढ़ गई है। उनके ऊपर कानूनी शिकंजा और ज्यादा कस गया है। रौशन कुमार के खिलाफ स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने आय से अधिक संपत्ति का दूसरा केस दर्ज किया है। पुलिस को उनके बेतिया स्थित घर से करीब 42 लाख 500 रुपए मिले हैं। रंगे हाथ रिश्वत में 5 लाख रुपए और स्मार्ट वॉच लेते हुए SVU की टीम ने इन्हें 1 मार्च को बेतिया में छापेमारी कर पकड़ा था। तब इनके उपर प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत पहला केस दर्ज किया गया था। तब से रौशन पटना के बेउर जेल में बंद हैं। ADG पंकज कुमार दाराद ने नई FIR 12/2026 दर्ज किए जाने की पुष्टि की है। रौशन कुमार की असिस्टेंट इंजीनियर की नौकरी परमानेंट नहीं थी। शिक्षा विभाग में कॉन्ट्रैक्ट पर नौकरी हुई थी। बेतिया के जिला शिक्षा परियोजना पदाधिकारी कार्यालय में पोस्टिंग थी।
उनकी सैलरी मात्र 40 हजार रुपए की थी। SVU के अनुसार, अक्टूबर 2023 में नौकरी लगने के बाद से लेकर गिरफ्तार किए जाने तक में कुल 29 महीने ही रौशन ने काम किया। इसी बीच कुल सैलरी 11 लाख 60 हजार रुपए रही। इसमें 3 लाख 86 हजार 666 रुपए इसने खर्च किए। इनकी कुल बचत 7 लाख 73 हजार 334 रुपए रही। बावजूद इसके जब जांच एजेंसी की टीम ने इसके बेतिया स्थित रौशन के घर पर छापेमारी की थी, तब एक कार्टून के अंदर से 42 लाख 500 रुपए कैश बरामद हुए थे।
इसी आधार पर SVU ने 34 लाख 27 हजार 166 रुपए आय से अधिक संपत्ति का नया केस 8 अप्रैल को दर्ज किया। जो रौशन की आमदनी से 295 प्रतिशत अधिक है। भ्रष्टाचार कर काली कमाई करने के मामले में रौशन अकेले नहीं है। जांच एजेंसी को इस बात की पूरी आशंका है कि रौशन के पास से मिले काली कमाई के 42 लाख 500 रुपए का बंटवारा कई लोगों के बीच होना था। अब SVU इसकी पूरी चेक और कनेक्शन को खंगालने की तैयारी में है। इसके लिए रौशन को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी। जांच एजेंसी की तरफ से बहुत जल्द स्पेशल विजिलेंस कोर्ट में अपील की जाएगी। 3-4 दिनों की रिमांड मांगी जाएगी। उम्मीद है कि रिमांड मिलने के बाद की पूछताछ में कई नई तथ्य सामने आ सकते हैं। जिसके आधार पर भ्रष्टाचार के खेल में रौशन के साथ शामिल दूसरे लोगों पर कानूनी शिकंजा कसा जा सकेगा।
दरअसल, लंबे वक्त से बेतिया में ठेकेदारों को लूटने का खेल चल रहा था। अपने ही रुपयों को लेने के लिए ठेकदारों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही थी। उनसे पेंडिंग बिल को पास कराने के नाम पर 10 प्रतिशत कमिशन मांगी जा रही थी। मोतिहारी के नौतन के रहने वाले शम्स तबरेज नाम के ठेकेदार ने परेशान होकर कंप्लेन किया था। दरअसल, वो सिविल वर्क का ठेका लेते हैं। बिहार शिक्षा परियोजना के तहत बेतिया के सरकारी स्कूलों में पानी के लिए बोरिंग करने का इन्हें कुल 57 लाख रुपए का ठेका मिला था। काफी समय से इनका बिल पेंडिंग था। इस बिल को पास करने के नाम पर असिस्टेंट इंजीनियर रौशन कुमार ने 10 प्रतिशत के रूप में 5 लाख 70 हजार रुपए रिश्वत मांगी थी।
25 फरवरी को ही ठेकेदार ने पटना आकर SVU में पूरे मामले की जानकारी दी। लिखित तौर पर कंप्लेन किया। 27 फरवरी को SVU ने ठेकेदार की तरफ से लगाए गए आरोपों की जांच कराई। जो सही मिली। इसके बाद ही रौशन कुमार को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ने के लिए जाल बिछाया गया था। डीएसपी और उनकी टीम ने रंगे हाथ ट्रैप किया।
