होर्मुज में भारतीय जहाजों की रफ्तार पर ब्रेक, 16 कंटेनर कर रहे नेवी के ‘ग्रीन सिग्नल’ का इंतजार
पश्चिम एशिया में हालिया तनाव और सीजफायर के बाद रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रैट से समुद्री आवाजाही फिर से शुरू होने की उम्मीद है. हालांकि, 5 अप्रैल के बाद से अब तक कोई भी भारतीय-ध्वज वाला जहाज होर्मुज को पार नहीं कर पाया है. सूत्रों के अनुसार, भारतीय नौसेना वर्तमान में हालात पर बारीकी से नजर बनाए हुए है और सुरक्षा सुनिश्चित होने के बाद ही जहाजों को आगे बढ़ने की अनुमति दी जाएगी. वर्तमान में 16 भारतीय झंडे वाले जहाज होर्मुज के पश्चिमी हिस्से (फारस की खाड़ी) में फंसे हुए हैं. इनमें एलएनजी (LNG), एलपीजी (LPG), कच्चे तेल के वाहक, कंटेनर पोत और ड्रेजर तथा रासायनिक पदार्थ ले जाने वाले जहाज शामिल हैं.
एलपीजी पोत ‘जग विक्रम’ अभी भी शारजाह में खड़ा है और निर्देशों का इंतजार कर रहा है. सूत्रों के मुताबिक, पहले चरण में 5-6 जहाजों के जल्द ही नेवी की क्लीयरेंस मिलने के बाद होर्मुज पार करने की संभावना है. सरकारी सूत्रों की मानें तो 5 से 6 जहाजों का पहला बैच जल्द ही नौसेना की हरी झंडी के बाद होर्मुज पार कर सकता है. इसे लेकर ईरानी अधिकारियों और चालक दल के साथ बातचीत जारी है.
जंग के दौरान कुल 25 भारतीय जहाज़ इस क्षेत्र में मौजूद थे, जिनमें से 9 अब तक सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रैट को पार कर चुके हैं. भारतीय नौसेना की तैनाती में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है और एस्कॉर्ट (सुरक्षा) अभियान लगातार जारी हैं. नौसेना सुरक्षित रास्तों से जहाजों का मार्गदर्शन कर रही है और उन्हें ओमान की खाड़ी तक सुरक्षा घेरा प्रदान कर रही है.
गुरुग्राम स्थित भारतीय नौसेना के इन्फॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर–इंडियन ओशन रीजन (IFC-IOR) के अनुसार, युद्ध की शुरुआत से 6 अप्रैल तक फारस की खाड़ी, होर्मुज और ओमान की खाड़ी में 30 घटनाएं दर्ज की गईं. इनमें 23 जहाज़ों को निशाना बनाया गया, जिनमें मिसाइल और ड्रोन हमले भी शामिल थे, तथा 10 लोगों की मौत हुई. ये आंकड़े दर्शाते हैं कि क्षेत्र में कितनी अस्थिरता और जोखिम बना हुआ है.
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय नौसेना की सतर्कता और आपसी तालमेल के प्रयास भारतीय जहाजों/कंटेनरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. आने वाले दिनों में होर्मुज से आवाजाही धीरे-धीरे सामान्य होने की उम्मीद है.
इस बीच, ईरान की ओर से मिले ताजा संकेत होर्मुज पर कड़े नियंत्रण की संभावना की ओर इशारा करते हैं, जिससे समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं. वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए यह जलमार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है. आने वाले दिनों में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है, जिससे समुद्री व्यापार को गति मिल सकेगी.
