ये है दुनिया का सबसे तीखा पौधा, जिसके सामने फीकी है सबसे खतरनाक मिर्च

तीखेपन का नाम आते ही सबसे पहले जेहन में लाल मिर्च या हरी मिर्च का ख्याल आता है. दुनिया भर में मिर्च की ऐसी कई प्रजातियां हैं, जिन्हें खाने के नाम से ही लोगों के पसीने छूट जाते हैं. गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के मुताबिक पेप्पर एक्स दुनिया की सबसे तीखी मिर्च है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुदरत ने एक ऐसा पौधा भी बनाया है जिसके सामने दुनिया की सबसे धाकड़ मिर्च भी फीकी चाय जैसी लगती है? यह कोई मिर्च नहीं, बल्कि एक कैक्टस जैसा दिखने वाला साधारण सा पौधा है, जिसका तीखापन इतना जानलेवा है कि इसे केमिकल वेपन यानी रासायनिक हथियार की श्रेणी में रखा जा सकता है. ये इतना ज्यादा खतरनाक है कि इंसान की नसों को हमेशा के लिए सुन्न कर सकता है. इस पौधे के भीतर छिपा रेसिनिफेरा टॉक्सिन के कारण इसे चखना तो दूर, छूने मात्र से शरीर पर तेजाब जैसे जख्म बन सकते हैं. इसकी दो बूंद भी जान ले सकती है.

मोरक्को के पहाड़ों और नाइजीरिया के कुछ हिस्सों में पाया जाने वाला यह पौधा रेजिन स्पर्ज के नाम से जाना जाता है. इसमें पाया जाने वाला रेसिनिफेरा टॉक्सिन इसे दुनिया का सबसे तीखा और दर्दनाक पौधा बनाता है. आमतौर पर हम मिर्च के तीखेपन को कैप्साइसिन से मापते हैं. इसके लिए एक्सपर्ट स्कोविल स्केल का इस्तेमाल करते हैं. गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के मुताबिक, दुनिया की सबसे तीखी मिर्च पेपर एक्स का स्कोर स्कोविल स्केल पर 26.9 लाख यूनिट है. वहीं, मिर्च को तीखा बनाने वाला शुद्ध रसायन कैप्साइसिन 1.6 करोड़ स्कोविल यूनिट पर आता है, जो इंसान की जान लेने के लिए काफी है. लेकिन जब बात रेसिनिफेरा टॉक्सिन की आती है, तो आंकड़े होश उड़ा देते हैं. इस पौधे का तीखापन 16 अरब (16 Billion) स्कोविल यूनिट है. यानी यह शुद्ध मिर्च के मुकाबले 1000 गुना ज्यादा तीखा और जानलेवा है.

यह कल्पना करना भी मुश्किल है कि रेसिनिफेरा टॉक्सिन कितना भयानक महसूस होता होगा. यह असल में खाने की चीज नहीं, बल्कि एक रासायनिक हथियार जैसा है. जैसे ही यह इंसान के शरीर के संपर्क में आता है, यह सीधे दर्द महसूस करने वाले ‘TRPV1’ रिसेप्टर्स पर हमला करता है. मिर्च का कैप्साइसिन इन रिसेप्टर्स को थोड़ी देर के लिए उत्तेजित करता है, जिससे जलन महसूस होती है. लेकिन रेसिनिफेरा टॉक्सिन इन रिसेप्टर्स से इतनी मजबूती से जुड़ जाता है कि नसों की कोशिकाओं में कैल्शियम बहुत बढञ जाता है. यह ओवरलोड इतना ज्यादा होता है कि दर्द महसूस करने वाली नसें जलकर मर जाती हैं. इसका मतलब है कि इसे छूने या चखने के बाद इंसान उस हिस्से में कभी दर्द महसूस नहीं कर पाएगा, क्योंकि वहां की नसें हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगी.

वैज्ञानिकों का मानना है कि मोरक्को के सूखे और पथरीले इलाकों में उगने वाले इस पौधे ने खुद को शाकाहारी जानवरों से बचाने के लिए इस घातक हथियार को विकसित किया है. इसका एक छोटा सा हिस्सा भी अगर किसी जानवर के मुंह में चला जाए, तो उसे भयानक जलन और केमिकल बर्न का सामना करना पड़ता है. यही वजह है कि रेगिस्तान के भूखे जानवर भी इसके पास जाने की हिम्मत नहीं करते. भले ही यह पौधा दुनिया का सबसे तीखा और खतरनाक हो, लेकिन चिकित्सा विज्ञान के लिए यह एक बड़ी उम्मीद बनकर उभरा है. चूंकि यह दर्द महसूस करने वाली नसों को खत्म करने की ताकत रखता है, इसलिए वैज्ञानिक इसका उपयोग कैंसर के अंतिम चरण के मरीजों के लिए पेनकिलर के रूप में करने की कोशिश कर रहे हैं.