केंद्रीय कर्मचारियों को राहत का तोहफा, सरकार ने बढ़ाया 2% महंगाई भत्ता , वेतन में मिलेगा सीधा फायदा
देश के एक करोड़ से ज्यादा केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स का लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हो गया है। शनिवार, 18 अप्रैल को केंद्र सरकार ने महंगाई भत्ते (DA) में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी। इस फैसले के बाद अब महंगाई भत्ता 58 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गया है, जिससे कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी और पेंशन में सीधा इजाफा होगा। सूत्रों के मुताबिक, यह बढ़ोतरी जनवरी 2026 से लागू मानी जाएगी, यानी कर्मचारियों को एरियर का भी फायदा मिलेगा। आमतौर पर सरकार जनवरी और जुलाई में DA में संशोधन करती है, लेकिन इस बार घोषणा में देरी हुई और अप्रैल के मध्य में यह फैसला सामने आया। इससे पहले कर्मचारी मार्च की शुरुआत से ही इस ऐलान का इंतजार कर रहे थे।
महंगाई भत्ता सरकारी कर्मचारियों को दिया जाने वाला एक महत्वपूर्ण ‘कॉस्ट ऑफ लिविंग एडजस्टमेंट’ है, जिसका मकसद बढ़ती महंगाई के असर को कम करना होता है। यह मूल वेतन का एक निश्चित प्रतिशत होता है, जिससे कर्मचारियों की क्रय शक्ति और जीवन स्तर बनाए रखने में मदद मिलती है। DA बढ़ने का सीधा असर कर्मचारियों के मासिक वेतन और पेंशनर्स की पेंशन पर पड़ता है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कर्मचारी संगठन प्रस्तावित 8वें वेतन आयोग को लेकर अपनी मांगों को लेकर सक्रिय हैं। राष्ट्रीय परिषद-संयुक्त परामर्शदात्री तंत्र (NC-JCM) ने सरकार को दिए ज्ञापन में 3.83 के उच्च फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। यदि यह मांग मान ली जाती है, तो न्यूनतम मूल वेतन 18,000 रुपये से बढ़कर करीब 69,000 रुपये तक पहुंच सकता है।
इसके अलावा, संगठन ने सैलरी कैलकुलेशन में “परिवार” की परिभाषा का दायरा बढ़ाने का सुझाव भी दिया है, जिसमें आश्रित माता-पिता को शामिल करने की मांग की गई है। साथ ही वेतन असमानता को सीमित करने और महंगाई के हिसाब से भत्तों में और सुधार की भी सिफारिश की गई है। इसी कैबिनेट बैठक में सरकार ने कुछ और अहम फैसले भी लिए हैं। 13,000 करोड़ रुपये के फंड के साथ ‘सॉवरेन मैरीटाइम फंड’ को मंजूरी दी गई है, जिसका उद्देश्य भारतीय जहाजों को सस्ती और स्थिर इंश्योरेंस सुरक्षा प्रदान करना है। इससे समुद्री व्यापार को मजबूती मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना को 2028 तक बढ़ाने का फैसला लिया गया है। इस योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए 3,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट आवंटित किया गया है।
