‘भारत का श्राप’ कहलाता है ये पौधा!

भारत में कई ऐसे पौधे पाए जाते हैं जो अपनी खूबसूरती से लोगों को आकर्षित करते हैं, लेकिन उनके पीछे छिपा सच काफी खतरनाक होता है. ऐसा ही एक पौधा है लैंटाना, जिसे अक्सर “भारत का श्राप” कहा जाता है. पहली नजर में यह पौधा रंग-बिरंगे फूलों के कारण बेहद आकर्षक लगता है, लेकिन इसके नुकसान जानकर आप हैरान रह जाएंगे. लैंटाना एक आक्रामक (इनवेसिव) प्रजाति का पौधा है, जो बहुत तेजी से फैलता है. इसकी खासियत यह है कि यह सूखा और खारे पानी जैसी कठिन परिस्थितियों में भी आसानी से जीवित रह सकता है. यही वजह है कि यह एक बार जहां उग जाता है, वहां से इसे हटाना बेहद मुश्किल हो जाता है.

इस पौधे की सबसे खतरनाक बात इसकी जहरीली प्रकृति है. इसके पत्ते अगर मवेशी या अन्य जानवर खा लें, तो उनके शरीर पर गंभीर असर पड़ सकता है. वैज्ञानिकों के अनुसार, लैंटाना के सेवन से जानवरों के लिवर पर बुरा प्रभाव पड़ता है और कई मामलों में उनके अंग फेल होने लगते हैं. इसके अलावा, यह त्वचा को सूरज की रोशनी के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बना देता है, जिससे स्किन को भी नुकसान होता है. हालांकि, यह भी सच है कि इस पौधे के कुछ हिस्सों का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में किया जाता है. इसके पूरी तरह पके हुए फल कुछ जगहों पर खाने योग्य माने जाते हैं, लेकिन कच्चे फल जहरीले हो सकते हैं. यही वजह है कि इस पौधे को लेकर लोगों में भ्रम बना रहता है.

लैंटाना केवल जानवरों के लिए ही नहीं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी बड़ा खतरा है. यह पौधा अपने आसपास की जमीन में ऐसे रसायन छोड़ता है, जो अन्य पौधों के उगने में बाधा डालते हैं. इस प्रक्रिया को एलीलोपैथी कहा जाता है. यानी यह अपने आसपास की जमीन को ही जहरीला बना देता है, जिससे स्थानीय वनस्पतियां खत्म होने लगती है. भारत के कई जंगलों में यह पौधा तेजी से फैल चुका है. रिपोर्ट्स के अनुसार, यह देश के लगभग 40 प्रतिशत टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में फैल गया है. इसका घना जाल घास और अन्य पौधों को ढक देता है, जिससे हिरण जैसे शाकाहारी जानवरों को भोजन नहीं मिल पाता. इसके कारण वन्यजीवों को अपना प्राकृतिक आवास छोड़ना पड़ता है. एक और गंभीर खतरा यह है कि लैंटाना जंगल की आग को और भी खतरनाक बना सकता है. इसमें मौजूद तेल जल्दी आग पकड़ लेते हैं और इसे “लैडर फ्यूल” की तरह काम करने वाला पौधा माना जाता है, जो जमीन की आग को पेड़ों की ऊंचाई तक पहुंचा देता है. इससे जंगल की आग ज्यादा तेजी से फैलती है और नुकसान भी बढ़ जाता है.