लाइव मैच में IPL क्रिकेटर ने जेब से निकाली पर्ची, लिखा था ‘जय श्री राम’, जानिए पूरा मामला
इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में अक्सर बड़े शॉट, तेज गेंदें और हाई-प्रोफाइल सितारे सुर्खियां बटोरते हैं, लेकिन इस बार चर्चा एक ऐसी पर्ची की है, जिसने 15 साल के संघर्ष को कुछ लाइनों में समेट दिया. मुंबई इंडियंस के लिए खेल रहे 33 साल के स्पिनर रघु शर्मा ने अपना पहला IPL विकेट लेने के बाद जेब से एक कागज निकाला और कैमरे की ओर दिखाया. उस पर्ची पर लिखा संदेश अब सोशल मीडिया से लेकर क्रिकेट जगत तक चर्चा का विषय बना हुआ है.
सोमवार को वानखेड़े में लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) के खिलाफ मैच…
ओवर: 12.1… अक्षत रघुवंशी को आउट किया- कॉट एंड बोल्ड.
लेकिन असली कहानी उसके बाद शुरू हुई. रघु ने जेब से एक कागज निकाला…
और कैमरे की तरफ दिखाया.
मैच के दौरान रघु शर्मा ने जैसे ही अपना पहला विकेट हासिल किया, उन्होंने पारंपरिक जश्न से अलग हटकर यह अनोखा तरीका अपनाया. उन्होंने शांत भाव से पर्ची निकालकर कैमरे को दिखाया. यह दृश्य वानखेड़े स्टेडियम में मौजूद दर्शकों के साथ-साथ टीवी पर मैच देख रहे करोड़ों लोगों के लिए भी भावुक कर देने वाला था.
रघु शर्मा की कहानी पारंपरिक क्रिकेट करियर से अलग रही है.
उन्होंने 18 साल की उम्र के बाद क्रिकेट को गंभीरता से अपनाया
शुरुआती दिनों में फिटनेस बड़ी चुनौती रही
घरेलू क्रिकेट में लगातार उतार-चढ़ाव झेलने पड़े
क्रिकेट में करियर बनाने की राह में उन्हें कई बार टीम से बाहर होना पड़ा, लेकिन उन्होंने प्रयास नहीं छोड़ा.
रघु ने पंजाब और पुडुचेरी जैसे घरेलू टीमों के साथ खेलते हुए अपने खेल को निखारा. IPL में उन्हें लंबे समय तक सिर्फ नेट गेंदबाज के रूप में मौका मिला. बड़े खिलाड़ियों को अभ्यास कराते-कराते उनका खुद का मौका लगातार टलता रहा.
हालांकि, मुंबई इंडियंस ने 2025 में उन्हें टीम से जोड़ा और 2026 सीजन में आखिरकार उन्हें डेब्यू का अवसर मिला.
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जहां अधिकांश खिलाड़ी 20-25 की उम्र में IPL में पहचान बना लेते हैं, वहीं रघु शर्मा ने 33 साल की उम्र में इस लीग में कदम रखा। यह अपने आप में एक असाधारण उपलब्धि मानी जा रही है.
रघु शर्मा का व्यक्तित्व सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं है.
गले में तुलसी की माला
सिर पर चोटी
ईश्वर के प्रति गहरी आस्था
उनकी पर्ची में ‘जय श्री राम’ लिखना इसी विश्वास को दर्शाता है.
रघु शर्मा की इस पर्ची ने यह दिखाया कि क्रिकेट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि भावनाओं, संघर्ष और धैर्य की भी कहानी है. 15 साल के इंतजार के बाद मिले इस मौके को उन्होंने शब्दों में ढालकर यादगार बना दिया.
