खिलाड़ियों ने फ्रेंच ओपन बायकॉट की चेतावनी दी, सबालेंका बोलीं-इनामी राशि नहीं बढ़ी तो खिलाड़ी टूर्नामेंट छोड़ सकते हैं
महिला वर्ल्ड नंबर-1आर्यना सबालेंका ने मंगलवार को कहा कि अगर फ्रेंच ओपन में प्राइज मनी नहीं बढ़ाई गई तो खिलाड़ी टूर्नामेंट का बहिष्कार कर सकते हैं। अमेरिकी स्टार कोको गॉफ ने भी इसका समर्थन किया। पुरुष वर्ग के नंबर-1 खिलाड़ी जैनिक सिनर और टॉप-10 के कई अन्य खिलाड़ियों ने भी इनामी राशि को लेकर नाराजगी जताई है। सबालेंका का बयान ऐसे समय आया है, जब आयोजकों और खिलाड़ियों के बीच कमाई के बंटवारे को लेकर विवाद बढ़ गया है। इस साल फ्रेंच ओपन की प्राइज मनी 9.5% बढ़कर 61.7 मिलियन यूरो (686 करोड़ रुपए) हो गई है, लेकिन खिलाड़ी इसे कम मानते हैं। खिलाड़ियों ने सोमवार को दावा किया कि टूर्नामेंट रेवेन्यू में उनकी हिस्सेदारी 2024 के 15.5% से घटकर 2026 तक 14.9% हो सकती है। खिलाड़ी रेवेन्यू में 22% हिस्सेदारी चाहते हैं, जो ATP और WTA के 1000 लेवल टूर्नामेंट्स के बराबर है। इटालियन ओपन के दौरान 28वां जन्मदिन मना रहीं आर्यना सबालेंका ने कहा, ‘हमारे बिना कोई टूर्नामेंट नहीं होगा और न ही कोई मनोरंजन। मुझे लगता है कि हम निश्चित रूप से रेवेन्यू का ज्यादा प्रतिशत पाने के हकदार हैं।’
उन्होंने कहा, ‘एक समय ऐसा आएगा जब हम इसका बहिष्कार करेंगे। मुझे लगता है कि अपने अधिकारों के लिए लड़ने का यही एकमात्र तरीका बचा है। खिलाड़ी सिर्फ इनामी राशि ही नहीं, बल्कि चारों ग्रैंड स्लैम-औस्ट्रेलियन ओपन, फ्रेंच ओपन, विंबलडन चैंपियनशिप और यूएस ओपन से बेहतर प्रतिनिधित्व, स्वास्थ्य सुविधाएं और पेंशन की भी मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट करोड़ों का मुनाफा कमाते हैं, लेकिन एथलीटों को उनके श्रम के अनुपात में लाभ नहीं मिलता। खिलाड़ियों के कड़े विरोध और साझा बयान पर फ्रेंच ओपन आयोजकों ने फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। टेनिस में ऐसे मतभेद पहले भी हुए हैं, लेकिन महिला और पुरुष वर्ग के दोनों नंबर-1 खिलाड़ियों का साथ आना टूर्नामेंट की छवि पर असर डाल सकता है।
