तमिलनाडु में बड़ा सियासी गेम, AIADMK को समर्थन देने को तैयार DMK..
तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा सियासी उलटफेर हो सकता है. चुनाव नतीजे आने के बदा वहां कोई सरकार बहुमत प्राप्त नहीं कर पाया. विजय 107 सीटें लाकर भी बहुमत से दूर हैं क्योंकि उनके साथ कांग्रेस के अलावा कोई और आने को तैयार नहीं है. इस बीच चर्चा है कि दो सियासी दुश्मन डीएमके और एडीएमके साथ आ सकते हैं. डीएमके ने इस बाबत तो शर्त भी रख दी है. सूत्रों की मानें तो डीएमके ने एडीएमके को कहा है कि अगर आप हमारे साथ आना चाहते हैं तो आपको बीजेपी से गठबंधन तोड़ना होगा. तमिलनाडु में एकदूसरे के खिलाफ चुनाव लड़े दो सियासी धड़े डीएमके और एडीएमके अब साथ आने की प्लानिंग में हैं. DMK और VCK सूत्रों के अनुसार AIADMK पर तब तक विचार नहीं किया जा सकता, जब तक वह बीजेपी से अलग नहीं होती. अगर AIADMK NDA में बनी रहती है, तो किसी भी संभावित गठबंधन पर चर्चा संभव नहीं है. डीएमके का कहना है कि किसी भी सांप्रदायिक पार्टी को स्वीकार नहीं किया जाएगा.
सूत्रों ने बताया कि वाम दल गठबंधन का फैसला विचारधारा और लोकतंत्र के आधार पर करेंगे.TVK को जनता का जनादेश मिला है.वाम दलों को AIADMK को लेकर असहजता है, क्योंकि वह बीजेपी की सहयोगी है. तमिलनाडु के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि कोई एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं आया है. थलापति विजय की टीवीके को 107 सीटें आई हैं लेकिन वह बहुत के जादुई आंकड़े 118 से 11 सीटें दूर है. उसे कांग्रेस जिसकी 5 सीटें हैं ने समर्थन देने का ऐलान किया है पर उसके बाद भी आंकड़ा 112 पर आकर रुक गया. टीवीके-कांग्रेस को बाकी दलों का साथ भी चाहिए लेकिन डीएमके-एडीएमके को सत्ता से दूर रखने के लिए बाकी दल टीवीके के साथ नहीं आ रहे. पीएमके के पास 4 विधायक हैं,IUML के पास 2, सीपीआई के पास 2, वीसीके के पास, सीपीआई-एम के पास 2 विधायक हैं. ये कोई भी टीवीके के साथ जाने को तैयार नहीं हैं. डीएमके के पास 59 विधायक हैं तो एडीएमके के पास 47 जो कुल जोड़ 106 ही बना रहा है. हालांकि इस गठबंधन का साथ देने को छोटी पार्टियां मान भी सकती हैं. लेफ्ट की दोनों पार्टियां समर्थन देने को राजी हैं.
