अंटार्कटिका में अचानक गायब हो गई यूरोप जितनी बड़ी बर्फ

दुनिया के सबसे ठंडे और रहस्यमयी महाद्वीप अंटार्कटिका को लेकर वैज्ञानिकों ने एक ऐसा खुलासा किया है, जिसने सबको हैरान कर दिया है. दशकों तक ग्लोबल वार्मिंग से भी प्रभावित न होने वाली अंटार्कटिका की सफेद चादर अब तेजी से पिघलने लगी है? बर्फ पिघलने की रफ्तार इतना तेज है कि साल 2023 में तो अंटार्कटिका से पश्चिमी यूरोप से भी बड़े आकार का बर्फ का हिस्सा पिघलकर पानी बन गया? सालों से वैज्ञानिक बर्फ पिघलने के कारण को खोज रहे थे. अब नई रिपोर्ट आई है, जो न इस रहस्य से पर्दा उठाया है. साथ ही अंटार्कटिका में तेजी से पिघल रही बर्फ से संभावति खतरों को लेकर वैज्ञानिकों ने अलर्ट किया है.वैज्ञानिकों को यह पता लगा लिया है कि ग्लोबल वार्मिंग को भी मात देने वाला अंटार्कटिका की समुद्री बर्फ अचानक इतनी तेजी से क्यों पिघल रही है. साइंस एडवांसेज जर्नल में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार इस तबाही के पीछे समुद्र की गहराई में बढ़ती गर्मी और अंटार्कटिका के चारों ओर चलने वाली तेज पश्चिमी हवाएं हैं.

साल 2000 से 2010 के बीच जहां एक ओर आर्कटिक की बर्फ तेजी से पानी बनती जा रही थी, तो उस समय अंटार्कटिका की बर्फ काफी हद तक सुरक्षित थी. लेकिन 5 साल बाद यानी 2015 के बाद अचानक स्थिति पूरी तरह से बदल गई और यहां की बर्फ रिकॉर्ड स्तर पर पिघलने लगी. बर्फ पिघलने की रफ्तार इतना तेज है कि साल 2023 में तो हालात इतने खराब हो गए कि अंटार्कटिका ने इतिहास की सबसे कम बर्फ रिकार्ड हुई. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस दौरान अंटार्कटिका ने पश्चिमी यूरोप से भी बड़े हिस्से को बर्फ खो दी.

रिसर्च के अनुसार अंटार्कटिका के चक्कर काटने वाली तेज पश्चिमी हवाओं ने समुद्र की प्राकृतिक परतों पर बड़ा असर डाला है और उन्हें पूरी तरह से बिगाड़ दिया. इन हवाओं ने ऊपर की ठंडी परत को उत्तर की ओर धकेल दिया, जिससे नीचे छिपी गर्म और खारी लहरें ऊपर आने लगीं. शुरुआत में तो यह बदलाव ज्यादा असर नहीं दिखाया, इसका कारण यह है कि ऊपर की ठंडी परत बर्फ को बचाए हुए थी. लेकिन समय के साथ धीरे-धीरे नीचे की गर्म लहरों ने बर्फ को बचाने वाली ठंडी परत को ही खत्म कर दिया. जिससे साल 2015 तक आते-आते गर्म पानी इस सुरक्षा कवच को तोड़कर सतह पर आ गया, और फिर बर्फ तेजी से पिघलने लगी.

वैज्ञानिकों के अनुसार अंटार्कटिका में तेजी से बर्फ पिघलने से एक खतरनाक फीडबैक लूप की शुरूआत हो गई है. बर्फ कम होने से सूरज की किरणें वापस अंतरिक्ष में नहीं पहुंच पा रही हैं, जिससे समुद्र का पानी ज्यादा गर्मी झेल रहा है और पानी गर्म हो जा रहा है. यही गर्मी सर्दियों में भी नई बर्फ को जमने नहीं दे रही है. इस खतरनाक हवा के पीछे ओजोन परत का छेद और ग्रीनहाउस गैसें जिम्मेदार हैं.