ये है सबसे मोटी चमड़ी वाला जानवर, प्रकृति ने पहनाया है ‘स्वेटर’

साइबेरिया की बर्फीली वादियों में जहां इंसान भी कुछ मिनटों में ठिठुर कर रह जाता है, वहां एक जानवर राज करता है. माइनस 40 डिग्री से भी ज्यादा ठंड में ये बेफिक्र घूमता फिरता है. बर्फीली हवाएं इसके शरीर को छू भी नहीं पाती. ये है साइबेरियन बाघ, जिसे अमूर टाइगर भी कहा जाता है. दुनिया के सबसे बड़े और खतरनाक बिल्लियों में शुमार ये प्रजाति प्रकृति का कमाल है. साइबेरियन बाघ की सबसे बड़ी खासियत है इसकी मोटी चमड़ी और उसके नीचे मौजूद चर्बी की मोटी परत. सामान्य बाघों की तुलना में इनकी फर (फर को लोक भाषा में चमड़ी कहा जाता है) बहुत घनी और लंबी होती है. सर्दियों में ये फर और भी मोटा हो जाता है. गर्दन के चारों ओर बालों की परत इसे ठंड से बचाती है.

वैज्ञानिकों के अनुसार इनकी सर्दियों वाली फर गर्मियों वाली फर से दोगुनी मोटी हो सकती है. इसके अलावा शरीर पर चर्बी की मोटी परत इंसुलेशन का काम करती है जो शरीर की गर्मी को अंदर रखती है. ये बाघ 300 किलो तक वजन का हो सकता है. नर बाघ औसतन 176 से 222 किलो तक होते हैं जबकि कुछ बड़े नमूने 300 किलो से ज्यादा भी पाए गए हैं. इनकी लंबाई पूंछ समेत 3 मीटर से ज्यादा हो सकती है. इतना भारी-भरकम शरीर होने के बावजूद ये बर्फ पर हल्के कदमों से चलता है. इसके बड़े-बड़े पंजों पर घनी बालों की परत होती है जो स्नोशू की तरह काम करती है. इससे ये बर्फ में धंसता नहीं और चुपके से शिकार के पास पहुंच जाता है.

साइबेरियन बाघ का शिकार करना भी कमाल का है. ये अकेला शिकारी है, जो जंगलों में घंटों इंतजार करता है और फिर एक झपट्टे में 200-300 किलो के हिरण या वाइल्ड बोअर को गिरा देता है. माइनस तापमान में भी इसकी ताकत और फुर्ती कम नहीं होती. ठंड के कारण शिकार कम मिलने पर ये कई दिनों तक भूखा रह सकता है. चर्बी की परत इसमें मदद करती है. ये बाघ मुख्य रूप से रूस के सुदूर पूर्वी इलाकों, चीन और उत्तर कोरिया के कुछ हिस्सों में पाए जाते हैं. इनका प्राकृतिक निवास ताइगा जंगल है जहां बर्फ साल भर रहती है. यहां का तापमान अक्सर माइनस 40 डिग्री तक गिर जाता है. ऐसी स्थिति में दूसरे जानवर ठंड से मर सकते हैं लेकिन साइबेरियन बाघ आराम से घूमता है. वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार साइबेरियन बाघ की फर अन्य बाघ प्रजातियों से सबसे मोटी होती है. बाल लंबे और घने होते हैं जो हवा को अंदर नहीं जाने देते. पंजों पर बाल पैरों को गर्म रखते हैं और फ्रॉस्टबाइट से बचाते हैं. ये अनुकूलन इसे दुनिया के सबसे ठंडे इलाकों में जीवित रहने में सक्षम बनाते हैं.