रूस में बसा वो रहस्यमयी हिंदू गांव, जहां गूंजते हैं ‘ओम नमः शिवाय’ और ‘हरे कृष्ण’ के मंत्र
भारत में जहां काफी लोग ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं हासिल करने की भौतिकतावादी दौड़ में लगे हैं. वहीं पश्चिमी देशों के लोग इस तरह की सुविधाओं से ऊब चुके हैं. वे अब तन- मन की शांति चाहते हैं और प्रकृति का रहस्य समझना चाहते हैं. उन्हें अपने सारे सवालों का जवाब सनातन संस्कृति में मिल रहा है. आलम ये है कि भारत से हजारों किमी दूर रूस के साइबेरिया में वहां के लोगों ने एक हिंदू गांव ही बसा लिया है. वहां रहने वाले सारे लोग रूसी हैं लेकिन वे सनातन संस्कृति को मानते हैं. वहां पर दिनभर ‘ओम नमः शिवाय’ और ‘हरे कृष्ण’ के मंत्र गूंजते रहते हैं. आपको साइबेरिया में बसे इस अनोखे हिंदू गांव की सैर पर लेकर चलते हैं, जहां पर भारतीयता इतने गहरे तक समाई हुई है कि आप खुद हैरान रह जाएंगे.
रूस के इस ‘हिंदू विलेज’ या ‘मिनी इंडिया’ का नाम Okunevo है. यह गांव रूस के साइबेरिया क्षेत्र में स्थित है. यहां पर हरे कृष्णा भजन, योग और हिंदू आध्यात्मिक परंपराओं का गहरा प्रभाव है. इसी वजह से इसे ‘रूस का हिंदू गांव’ कहा जाता है. साइबेरिया की इस बर्फीली धरती पर तापमान माइनस 40 से माइनस 50 डिग्री तक गिर जाता है. इसके बावजूद ओकुनेवो गांव में ‘ओम नमः शिवाय’ और ‘हरे कृष्ण’ के मंत्र रोजाना सुबह गूंजते हैं. वहां पर हवन की अग्नि जलती रहती है और भजन की धुन लोगों को मंत्रमुग्ध करती है. यह गांव रूस के ओम्स्क ओब्लास्ट में बसा है. इसे ‘हिंदू विलेज ऑफ रूस’ के नाम से भी जाना जाता है.
इस गांव की आबादी करीब 300 लोगों की है. हालांकि, गर्मियों में योगी, तीर्थयात्री और पर्यटकों के आने से यह संख्या दोगुनी हो जाती है. इस गांव को लिथुआनिया की मूल निवासी रास्मा रोजिटिस ने बसाया था. वे हिमालय में रहने वाले ऐदाखन बाबाजी की शिष्या थी. उन्होंने उन्हें रजनी नाम दिया. जब वे 1991 में ओम्स्क नदी के किनारे पहुंची तो आध्यात्मिक संकेतों के जरिए उन्हें आभास हुआ कि यही जगह रामायण काल के हनुमान मंदिर की प्राचीन स्थली है.
उन्होंने इसे पृथ्वी का नाभि स्थल घोषित कर वहां पर प्रवास शुरू कर दिया. वर्ष 1992-95 में उन्होंने गांव में ओमकार शिव धाम आश्रम की स्थापना की. यह रूस के शुरुआती हिंदू आश्रमों में से एक था. धीरे-धीरे गांव के आम लोग भी आश्रम से जुड़ने लगे और यह गांव हिंदू संस्कृति के केंद्र के रूप में मशहूर होने लगा.
आज की तारीख में ओकुनेवो गांव अद्भुत धार्मिक सद्भाव के रूप में प्रसिद्ध है. एक ओर बाबाजी के शैव साधक अपनी साधना में लीन रहते हैं तो दूसरी ओर ISKCON के अनुयायी वहां पर हरे कृष्ण का मंत्र जाप करते रहते हैं. वहां पर स्लाविक मूल धर्म के रोडनोवेरी लोग अपनी परंपराओं का पालन करते दिखते हैं. कुछ रूसी ऑर्थोडॉक्स ईसाई भी इसमें शामिल हैं. इस गांव में एक ऊंची पहाड़ी है, जिसका नाम ओमकार पहाड़ी है. वहां पर हिंदू धूनी हमेशा जलती रहती है. साथ ही ऑर्थोडॉक्स चैपल का चिह्न भी वहां पर लगा है. अब इस गांव में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक और योगी भी पहुंचने लगे हैं. वे वहां पर योग रिट्रीट, मेडिटेशन कैंप और आध्यात्मिक चर्चाएं करते हैं. वहां पहुंचकर उन्हें सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है.
गांव में रहने वाले स्थानीय रूसी परिवार अब भारतीय संस्कृति को आत्मसात कर चुके हैं. उनके लकड़ी से बने घरों में शिव-कृष्ण की मूर्तियां, संस्कृत श्लोक और राम-हनुमान के चित्र सजे हैं. वे योग, ध्यान, हवन और शाकाहारी जीवन जीते हैं. वे होली-दिवाली, जन्माष्टमी, रक्षाबंधन, शिवरात्रि जैसे तमाम भारतीय त्योहार मनाते हैं. उनकी सुबह की शुरुआत नमस्ते से होती है. भयंकर सर्दी के बावजूद सनातन के प्रति आस्था उन्हें अंदर से गर्माए रखती है. अब यह गांव विश्व स्तर पर आध्यात्मिक पर्यटन का केंद्र बन चुका है.
