यहां स्कूलों में पिलाई जाती थी शराब, खुद मां-बाप भेजते थे बोतल !
आज के समय में शराब को स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक माना जाता है. सरकारें इसे छोड़ने की अपील करती हैं, स्कूलों में सख्ती बरती जाती है और बच्चों को इससे दूर रखने की कोशिश की जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुछ दशक पहले फ्रांस में ठीक उलटा हो रहा था? फ्रांस के स्कूलों में बच्चों को नियमित रूप से शराब पिलाई जाती थी. माता-पिता खुद बच्चों के लंच बॉक्स में वाइन, बीयर या साइडर की बोतल डालकर भेजते थे. लंच ब्रेक में बच्चे दोस्तों के साथ बैठकर पेग बनाते और एंजॉय करते थे.
यह परंपरा 20वीं सदी के मध्य तक फ्रांस के कई इलाकों में आम थी. उस समय शराब को पौष्टिक भोजन का हिस्सा माना जाता था. लोग मानते थे कि शराब पानी से ज्यादा सुरक्षित है क्योंकि पानी अक्सर दूषित होता था. साथ ही इसे पाचन शक्ति बढ़ाने और शरीर को गर्म रखने वाला माना जाता था. छोटे बच्चों को दिन में आधा लीटर तक शराब दी जाती थी. उम्र बढ़ने के साथ मात्रा भी बढ़ जाती थी. स्कूलों में लंच टाइम सबसे मजेदार होता था. बच्चे अपनी-अपनी बोतल निकालते, दोस्तों के साथ शेयर करते और खाने के साथ शराब पीते थे. माता-पिता इस परंपरा का समर्थन करते थे. वे सोचते थे कि स्कूल में शराब पीने से बच्चे जिम्मेदारी सीखेंगे और फ्रेंच कल्चर से जुड़ेंगे. वाइन फ्रांस की संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रही है.
1956 में प्रधानमंत्री पिएरे मेंडेस फ्रांस ने इस परंपरा पर ब्रेक लगाया. उन्होंने 14 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए स्कूलों में शराब पर रोक लगा दी. यह बदलाव बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण को बेहतर बनाने के लिए किया गया था. स्कूलों में दूध को बढ़ावा दिया गया. हालांकि बड़े छात्रों को अभी भी सीमित मात्रा में शराब की इजाजत थी. पूरी तरह से स्कूलों में शराब पर प्रतिबंध 1981 में लगा. तब जाकर सभी उम्र के छात्रों के लिए अल्कोहल पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया. यह फ्रांस में बड़ा सांस्कृतिक और शैक्षिक बदलाव था. उस समय की तस्वीरें और कहानियां आज सुनकर हैरानी होती है. बच्चे स्कूल बैग में शराब की बोतल लेकर जाते थे. टीचर्स भी कभी-कभी साथ बैठकर पीते थे. शराब को भोजन के साथ सामान्य माना जाता था. फ्रांस के ग्रामीण इलाकों में यह परंपरा ज्यादा प्रचलित थी जहां वाइन स्थानीय अर्थव्यवस्था का हिस्सा थी. आज फ्रांस में शराब अभी भी संस्कृति का हिस्सा है लेकिन बच्चों को स्कूल में बिल्कुल नहीं दी जाती है. सरकार सख्त कानून बनाकर बच्चों को शराब से दूर रखती है. स्वास्थ्य अभियान चलाए जाते हैं.
