रिलायंस जियो के IPO को लेकर आया बड़ा अपडेट, इतना बड़ा हो सकता है इश्यू साइज
भारतीय कॉरपोरेट जगत और शेयर बाजार के लिए एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज की आगामी एनुअल जनरल मीटिंग यानी AGM से ठीक पहले रिलायंस जियो अपने महा-आईपीओ को लॉन्च करने की तैयारी में है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिलायंस जियो करीब 4 अरब डॉलर का धमाकेदार इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग यानी IPO लाने के लिए ड्राफ्ट पेपर फाइल करने के बिल्कुल करीब पहुंच चुकी है। इस बड़े कदम के बाद जियो का आईपीओ भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक नया रिकॉर्ड बना सकता है। बाजार के इनवेस्टर्स और विश्लेषकों की नजरें 19 जून को होने वाली रिलायंस की AGM पर टिकी हुई हैं, जहां मुकेश अंबानी इस बड़े प्लान का एलान कर सकते हैं।
रिलायंस जियो का यह आईपीओ अगर तय योजना के मुताबिक बाजार में उतरता है, तो यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू बन जाएगा। अनुमानित 4 अरब डॉलर के साइज के साथ यह आईपीओ हाल ही में आए हुंडई मोटर इंडिया के 3.3 अरब डॉलर के आईपीओ को भी पीछे छोड़ देगा। भारतीय प्राइमरी मार्केट के लिए यह पेशकश एक ऐसे समय पर आ रही है जब पिछले दो रिकॉर्ड सालों के बाद बाजार में फंड जुटाने की एक्टिविटी थोड़ी धीमी हुई है। जियो के बड़े स्केल और बाजार में उसकी मजबूत स्थिति को देखते हुए यह माना जा रहा है कि इस आईपीओ को लेकर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह के इनवेस्टर्स में भारी उत्साह देखने को मिलेगा।
जियो प्लेटफॉर्म्स ने इससे पहले साल 2020 में दुनिया भर के 13 बड़े इनवेस्टर्स से 1.5 लाख करोड़ रुपये यानी लगभग 20 अरब डॉलर से ज्यादा का फंड जुटाया था। इस बड़ी लिस्ट में गूगल, मेटा, सिल्वर लेक, केकेआर, विस्टा इक्विटी पार्टनर्स, जनरल अटलांटिक, अबू धाबी इनवेस्टमेंट अथॉरिटी, सऊदी अरब का पब्लिक इनवेस्टमेंट फंड, टीपीजी, एल कैटरटन, इंटेल कैपिटल और क्वालकॉम वेंचर्स जैसे दिग्गज नाम शामिल थे। यह भारत के कॉरपोरेट इतिहास में फंड जुटाने के सबसे बड़े अभियानों में से एक था, जिसने कंपनी को पूरी तरह से कर्ज मुक्त बनाने में मदद की थी। इसके बाद से जियो ने देश में 5जी सर्विसेज, ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी, डिजिटल प्लेटफॉर्म और एंटरप्राइज सोल्यूशंस का तेजी से विस्तार किया है और भारत की टॉप डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर कंपनी बन गई है।
रिलायंस ने इस बार आईपीओ के स्ट्रक्चर में एक बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। पहले की योजनाओं के उलट कंपनी ने ऑफर फॉर सेल यानी OFS का रास्ता छोड़कर मुख्य रूप से एक नया फ्रेश इश्यू लाने पर फोकस किया है। यह फैसला मौजूदा शेयरधारकों के साथ वैल्यूएशन की उम्मीदों को लेकर हुई चर्चा के बाद लिया गया है। इस नए स्ट्रक्चर का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि आईपीओ से मिलने वाला पूरा पैसा सीधे जियो के बिजनेस ऑपरेशन को मजबूत करने में लगाया जाएगा, न कि पुराने इनवेस्टर्स के शेयर बेचने में खर्च होगा। इस तरीके से कंपनी अपनी वैल्यूएशन की उम्मीदों को भी बिल्कुल सही रखना चाहती है ताकि मार्केट में एंट्री के बाद लॉन्ग टर्म वैल्यू ग्रोथ की अच्छी संभावना बनी रहे।
रिलायंस इंडस्ट्रीज की यह 49वीं एनुअल जनरल मीटिंग 19 जून 2026 को दोपहर 2:00 बजे आयोजित की जाएगी। यह मीटिंग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और अन्य ऑडियो विजुअल तरीकों से पूरी तरह वर्चुअल होगी, जैसा कि कंपनी पिछले कुछ सालों से करती आ रही है। आपको बता दें कि साल 2025 की AGM में मुकेश अंबानी ने एलान किया था कि जियो को 2026 के पहले छह महीनों में शेयर बाजार में लिस्ट कर दिया जाएगा।
