अब रेगिस्तान में भी नहीं सूखेगा गला! यह जैकेट हवा से बना रही है पीने का पानी

दुनिया में बढ़ते जल संकट के बीच वैज्ञानिकों ने एक ऐसी जैकेट तैयार की है, जो हवा में मौजूद नमी को पीने योग्य पानी में बदल सकती है. यह नई टेक्नोलॉजी दूरदराज और पानी की कमी वाले इलाकों में लोगों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है. जरा सोचिए कि आप किसी ऐसी जगह पर हैं, जहां दूर-दूर तक पानी की एक बूंद नहीं है, आपको तेज प्यास लगी है और आप अपनी जैकेट से शुद्ध, ठंडा पानी निकालकर पीने लगते हैं! सुनने में यह किसी साइंस-फिक्शन फिल्म की सीन लग सकता है, लेकिन वैज्ञानिकों ने अब इसे हकीकत में बदल दिया है. पानी की समस्या से परेशान दुनिया के लिए वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खोज कर दिया है, जो आने वाले समय में पीने के पानी की समस्या को दूर कर सकता है.

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के रिसर्चर्स ने एक ऐसी वॉटर-जेनरेटिंग जैकेट बनाई है, जो बिना किसी वाटर सोर्स के, सिर्फ हवा में मौजूद नमी को सोखकर उसे शुद्ध पीने के पानी में बदल सकती है. यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के रिसर्चर्स ने वॉटर-जेनरेटिंग जैकेट तैयार की है. यह जैकेट हर दिन लगभग 1 लीटर (400 से 900 मिलीलीटर) तक पीने का पानी बना सकती है. पानी की मात्रा इस बात पर निर्भर करेगी कि आसपास के मौसम में कितनी नमी है.

रिसर्चर्स ने इस जैकेट को बनाने के लिए एक एडवांस और स्पेशल कपड़े का इस्तेमाल किया है. यह कपड़ा हवा से पानी की भाप को अपनी तरफ खींचता है. इसके बाद, जैकेट में मौजूद सिस्टम इस भाप को गर्म और ठंडा करके लिक्विड यानी पानी में बदल देता है. इस पानी को जैकेट में ही लगी एक अलग होने वाली बोतल में जमा कर लिया जाता है.

जर्नल नेचर वॉटर में छपी रिसर्च के अनुसार, यह नया कपड़ा पहले से मौजूद वॉटर-हार्वेस्टिंग तकनीकों की तुलना में 3 से 10 गुना ज्यादा तेजी और बेहतर तरीके से काम करता है. रिसर्चर्स का मानना है कि यह तकनीक उन लोगों के लिए वरदान साबित होगी, जो ऐसे इलाकों में रहते हैं या काम करते हैं जहां साफ पानी आसानी से नहीं मिलता. इससे मुख्य रूप से इन लोगों को फायदा होगा-

पहाड़ों पर चढ़ने वाले और कैंपिंग करने वाले लोगों को.

रेगिस्तानी या दूरदराज के इलाकों में ड्यूटी कर रहे सैनिकों को.

खेतों में काम करने वाले किसान और मजदूर

आपदा प्रबंधन और इमरजेंसी रेस्क्यू टीमें को

सिर्फ जैकेट नहीं, टेंट और बैग भी बदलेंगे पानी में!

रिसर्चर्स इस कमाल की तकनीक को सिर्फ जैकेट तक सीमित नहीं रखना चाहते. आने वाले समय में इस स्पेशल मटेरियल का इस्तेमाल स्कूल बैग, टेंट और अस्थाई शेल्टर होम बनाने में भी किया जाएगा. जिससे प्राकृतिक आपदा या सूखे के समय लोगों को आसानी से पानी मिल सके.

इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने एक सोलर-पावर्ड डिवाइस भी टेस्ट किया है, जो सूरज की रोशनी से चलती है. इस डिवाइस ने रेगिस्तान जैसे सूखे इलाकों में भी हर दिन1.3 लीटर से लेकर 4.3 लीटर तक साफ पानी बनाकर दिखाया है.