सीबीएसई स्कूलों में नौवीं-दसवीं के छात्रों के लिए अब तीन भाषाएं अनिवार्य, एक जुलाई से व्यवस्था लागू

सीबीएसई के स्कूलों में नौवीं-दसवीं में तीन भाषाओं को पढ़ना अनिवार्य किया गया है। तीन भाषाओं में से कम-से-कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होंगी। सीबीएसई ने नई शिक्षा नीति (2020) और एनसीएफ 2023 के अनुसार भाषा शिक्षा में बड़ा बदलाव किया है। यह व्यवस्था एक जुलाई से लागू होगी। इससे पहले बोर्ड ने अप्रैल से छठी कक्षा में तीन भाषा फार्मूले को लागू किया था। जिले में सीबीएसई के 50 स्कूल संचालित हो रहे हैं। स्कूलों में नौवीं-दसवीं में तीन भाषाओं को पढ़ना अनिवार्य किया गया है। सीबीएसई ने इस बदलाव के संबंध में सभी स्कूलों को 15 मई 2026 को सर्कुलर जारी किया है।

यदि कोई छात्र विदेशी भाषा पढ़ना चाहता है, तो वह उसे तीसरी भाषा के रूप में तभी चुन सकेगा, जब बाकी दो भाषाएं भारतीय हों। अन्यथा विदेशी भाषा को चौथी अतिरिक्त भाषा के तौर पर पढ़ाया जाएगा। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि भाषा शिक्षा एनसीईआरटी के नए पाठ्यक्रम के अनुसार ही होगी। जब तक कक्षा नौ के लिए त्रिभाषा की अलग से पुस्तकें नहीं आतीं, तब तक विद्यार्थी चुनी गई भाषा की कक्षा छह की पुस्तक का 2026-27 संस्करण उपयोग करेंगे।

स्कूलों को स्थानीय या राज्य स्तरीय साहित्य भी पढ़ाना होगा। कक्षा 10 में त्रिभाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। इसका मूल्यांकन पूरी तरह स्कूल स्तर पर आंतरिक रूप से किया जाएगा। त्रिभाषा के अंक सीबीएसई प्रमाण-पत्र में दिखाए जाएंगे, लेकिन इस विषय के कारण किसी भी विद्यार्थी को बोर्ड परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जाएगा।