CG : सिप्ला को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, ब्लैकलिस्टिंग और राशि जब्ती आदेश रद्द
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कोविड-19 काल में रेमडेसिविर इंजेक्शन की आपूर्ति से जुड़े मामले में दवा कंपनी सिप्ला फार्मास्युटिकल्स को बड़ी राहत देते हुए राज्य शासन द्वारा जारी ब्लैकलिस्टिंग और सिक्योरिटी डिपॉजिट जब्त करने के आदेश को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने शासन को कंपनी की राजसात की गई प्रतिभूति राशि तत्काल लौटाने का निर्देश भी दिया है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि कंपनी के खिलाफ की गई कार्रवाई निष्पक्षता और न्यायिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थी।
मामला कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान रेमडेसिविर इंजेक्शन की आपूर्ति से जुड़ा है। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CGMSCL) ने मार्च 2021 में ई-टेंडर जारी किया था, जिसमें सिप्ला सफल बोलीदाता बनी। शुरुआत में कंपनी को 5 हजार वायल की आपूर्ति का आदेश मिला, लेकिन कुछ ही दिनों में अतिरिक्त ऑर्डर जारी कर कुल मांग करीब 61 हजार वायल तक पहुंचा दी गई। सिप्ला ने स्वास्थ्य विभाग को दिए जवाब में कहा था कि उस समय देशभर में रेमडेसिविर की मांग अचानक बढ़ गई थी। कच्चे माल की कमी, सप्लाई चेन में व्यवधान, लॉकडाउन, परिवहन समस्याएं और कर्मचारियों के संक्रमित होने जैसी परिस्थितियों के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ। इसके अलावा केंद्र सरकार के आवंटन निर्देशों का पालन करना भी अनिवार्य था।
कंपनी ने कई बार पत्र लिखकर अपनी व्यावहारिक कठिनाइयों से शासन को अवगत कराया था, लेकिन इसके बावजूद उसके खिलाफ कार्रवाई की गई।
स्वास्थ्य विभाग ने आपूर्ति पूरी नहीं होने का हवाला देते हुए सिप्ला को तीन वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया था और उसकी प्रतिभूति राशि भी जब्त कर ली थी। इस निर्णय को चुनौती देते हुए कंपनी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माना कि कंपनी द्वारा कोई धोखाधड़ी या जानबूझकर अनुबंध उल्लंघन नहीं किया गया था। परिस्थितियां असाधारण थीं और अचानक बढ़ी मांग को पूरा करना संभव नहीं था। कोर्ट ने कहा कि ब्लैकलिस्टिंग जैसी कार्रवाई तभी उचित मानी जा सकती है जब गलत नीयत या गंभीर अनुबंध उल्लंघन साबित हो। केवल परिस्थितिजन्य असफलता के आधार पर किसी कंपनी को भविष्य की सरकारी खरीद प्रक्रियाओं से बाहर करना उचित नहीं है।
इन्हीं टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने राज्य शासन का आदेश रद्द करते हुए कंपनी को राहत प्रदान की।
