ट्रम्प बोले- ईरान हिजबुल्लाह को रोके, वरना फिर हमला करेंगे, US-ईरान के बीच 82 मिनट बातचीत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी दी कि वह लेबनान में अपने समर्थक संगठन हिजबुल्लाह की गतिविधियों पर रोक लगाए। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अगर ऐसा ईरान ने हिजबुल्लाह को नहीं रोका, तो अमेरिका उस पर पिछले हफ्ते से भी ज्यादा बड़ा हमला करेगा। इसी बीच स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच 82 मिनट बातचीत चली। ईरान ने कहा- हमने अपनी फ्रीज की गई संपत्ति को वापस करने पर चर्चा की। साथ ही ईरान के एनर्जी सेक्टर पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने पर भी बात हुई। उधर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने वार्ता के दौरान कहा कि पिछले कुछ घंटों में अच्छी प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान मिलकर शांति और समृद्धि के लिए काम कर सकते हैं। वेंस के मुताबिक, ट्रम्प चाहते हैं कि दोनों देशों के रिश्तों में नया अध्याय शुरू हो और अगले 10 साल में पश्चिम एशिया की तस्वीर बदल जाए। पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में चल रही इस वार्ता का मकसद क्षेत्र में तनाव कम करना और स्थायी शांति की दिशा में आगे बढ़ना है।
ईरानी संसद स मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिकी धमकियों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि तेहरान पर इन चेतावनियों का कोई असर नहीं होता।
गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि अगर अमेरिकी धमकियां असरदार होतीं, तो वॉशिंगटन आज जिस स्थिति में है, वहां नहीं पहुंचता। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नेताओं को अपने बयानों में सावधानी बरतनी चाहिए। ईरानी स्पीकर ने कहा कि उनकी सशस्त्र सेनाएं जरूरत पड़ने पर अलग तरीके से जवाब देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, “वे जो चाहे कहें, लेकिन कार्रवाई हम करेंगे।”
हिजबुल्लाह ने लेबनान सरकार की अमेरिका के साथ सीधी बातचीत का विरोध किया है। संगठन का कहना है कि ये वार्ता लेबनान की संप्रभुता को कमजोर करेगी और इजराइल के हितों को बढ़ावा देगी। हिजबुल्लाह ने बयान में कहा कि वॉशिंगटन गई लेबनानी टीम पर ऐसी अमेरिकी शर्तें मानने का दबाव बनाया जा रहा है, जो देश की संप्रभुता को कमजोर करती हैं। संगठन के मुताबिक, बातचीत का आधार ही गलत है और इससे लेबनान के हितों की बजाय अमेरिकी और इजराइली नीतियों को फायदा होगा।
