30 या 31 जुलाई, कब से शुरू होगा सावन का महीना? नोट करें सभी सोमवारों की तिथि
सावन या श्रावण हिंदू पंचांग का पांचवां महीना होता है और इसे भगवान शिव के भक्तों के लिए सबसे पवित्र माना जाता है. यह पूरा महीना भगवान शिव को समर्पित होता है. मान्यता है कि यह भगवान शिव का प्रिय महीना है और इस दौरान पूजा-पाठ और भक्ति करने से विशेष फल और आशीर्वाद मिलता है. हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, सावन के महीने में भगवान शिव स्वयं सृष्टि का संचालन करते हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं.
श्रावण महीने का संबंध समुद्र मंथन की कथा से भी जोड़ा जाता है. मान्यता है कि इसी महीने देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था. इस मंथन से सबसे पहले हलाहल नाम का विष निकला, जो इतना घातक था कि पूरी सृष्टि को नष्ट कर सकता था. तब भगवान शिव ने इस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया और संसार की रक्षा की. इसी कारण सावन का महीना भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है. इस दौरान दुनिया भर के शिव मंदिरों में खास उत्सव और भीड़ देखने को मिलती है.
वहीं, सावन में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है. इस दिन को सावन सोमवार या सोमवार कहा जाता है. भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और शिव मंदिर जाकर पूजा करते हैं. कई लोग सावन के पहले सोमवार से सोलह सोमवार का व्रत भी शुरू करते हैं, जिसे सोलह सोमवर व्रत कहा जाता है.
श्रावण (सावन) महीने के सभी मंगलवार माता पार्वती को समर्पित होते हैं, जो भगवान शिव की पत्नी हैं. इस दिन व्रत रखने को मंगला गौरी व्रत कहा जाता है. इसके अलावा सावन में सावन शिवरात्रि और हरियाली अमावस्या जैसे शुभ पर्व भी मनाए जाते हैं.
सावन की तिथियां
द्रिक पंचांग के अनुसार, सावन इस बार 30 जुलाई से शुरू होकर श्रावण पूर्णिमा पर 28 अगस्त को समाप्त होंगे.
पहला सावन सोमवार- 3 अगस्त 2026
दूसरा सावन सोमवार- 10 अगस्त 2026
तीसरा सावन सोमवार- 17 अगस्त 2026
चौथा सावन सोमवार- 24 अगस्त 2025
दक्षिण भारत में सावन का महत्व
श्रावण (सावन) महीने की शुरुआत अलग-अलग क्षेत्रों में अलग तिथि से होती है, क्योंकि भारत में दो तरह के चंद्र कैलेंडर माने जाते हैं- पूर्णिमांत और अमांत. इन दोनों कैलेंडरों में करीब 15 दिन का अंतर होता है. उत्तर भारत के ज्यादातर राज्यों में पूर्णिमांत कैलेंडर माना जाता है, जबकि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में अमांत कैलेंडर का पालन किया जाता है. इसी वजह से सावन सोमवार की तिथियों में भी अंतर देखने को मिलता है. अमांत कैलेंडर मानने वाले राज्यों में साल 2026 में सावन की शुरुआत 13 अगस्त से होगी.
पहला सावन सोमवार- 17 अगस्त 2026
दूसरा सावन सोमवार- 24 अगस्त 2026
तीसरा सावन सोमवार- 31 अगस्त 2026
चौथा सावन सोमवार- 7 सितंबर 2026
सावन में कैसे करें भगवान शिव की पूजा?
– सबसे पहले शिवलिंग पर गंगाजल, दूध और जल से अभिषेक करें.
– इसके बाद एक बार फिर साफ पानी चढ़ाएं.
– फिर भगवान शिव को 11 या 21 बेलपत्र अर्पित करें.
– इसके बाद शिवलिंग पर धतूरा, भांग, फूल, गेहूं, शहद, चंदन और मिठाई चढ़ाएं.
– पूजा के दौरान ‘ऊं नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें और भगवान शिव के 108 नामों का श्रद्धा से स्मरण करें.
– इसके बाद शुद्ध घी का दीपक जलाएं और धूप लगाएं.
– फिर शिव चालीसा और रुद्राष्टकम का पाठ करें.
– अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें.
