तिलक और तुलसी की माला पर आपत्ति! बंगाल के स्कूल से छात्रा को निकाला

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के पारा गर्ल्स हाई स्कूल में पढ़ने वाली कक्षा 11 की एक छात्रा से जुड़ा मामला इन दिनों चर्चा में है. छात्रा और उसके परिवार का आरोप है कि स्कूल में तुलसी की माला पहनने और चंदन का तिलक लगाने पर आपत्ति जताई गई. विरोध करने पर उसे कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया और स्कूल से निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई. परिवार का कहना है कि स्कूल प्रशासन ने ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) लेने के लिए दबाव बनाया. जब उन्होंने टीसी लेने से इनकार कर दिया तो उसे बाद में व्हाट्सऐप के जरिए भेज दिया गया. आरोप है कि इस पूरे घटनाक्रम से मानसिक रूप से आहत छात्रा ने आत्महत्या की कोशिश भी की. मामले में छात्रा की मां ने पारा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद इलाके में लोगों में नाराजगी देखने को मिली.

छात्रा की मां के अनुसार, उनकी बेटी शुरुआत में पूरे मामले पर कुछ भी बताने से डर रही थी. उनका कहना है कि बेटी को आशंका थी कि यदि परिवार स्कूल पहुंचा, तो स्थिति और बिगड़ सकती है. आखिरकार 18 जून 2026 को वह रोते हुए घर लौटी और उसने स्कूल में हुई पूरी घटना परिवार को बताई.

छात्रा सुमना माझी का आरोप है कि उसकी मां ने उसे तिलक लगाकर स्कूल जाने के लिए कहा था और किसी भी तरह की परेशानी होने पर घर पर बताने को कहा था. सुमना के मुताबिक, जब वह तिलक लगाकर स्कूल पहुंची तो शिक्षकों ने आपत्ति जताई. उसका दावा है कि उससे कहा गया कि स्कूल के नियम इसकी अनुमति नहीं देते. छात्रा का यह भी आरोप है कि उससे यह टिप्पणी की गई, ‘यह एक शिक्षण संस्थान है, तुम्हारे पिता का मंदिर नहीं.’

घटना के सामने आने के बाद इलाके के कुछ स्थानीय लोगों ने भी विरोध जताया. उनका कहना है कि यदि किसी छात्र को तिलक या तुलसी की माला पहनने से रोका गया है, तो यह धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर मुद्दा है. प्रदर्शन कर रहे लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.

वहीं स्कूल की हेडमिस्ट्रेस सुष्मिता घोष ने आरोपों को अलग नजरिए से देखा है. उनका कहना है कि पूरे मामले को एकतरफा ढंग से नहीं समझा जाना चाहिए. उनके अनुसार, विवाद का संबंध केवल तुलसी की माला से नहीं है, बल्कि स्कूल में अनुशासन बनाए रखने के लिए कुछ निर्देश दिए गए थे. उन्होंने कहा कि बिना पूरी जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा.

फिलहाल इस मामले में छात्रा के परिवार की शिकायत पुलिस के पास है और स्कूल प्रशासन भी अपना पक्ष रख चुका है. ऐसे में पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने और संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.