मदरसा दारुल उलूम में अनियमितताओं की शिकायत, बाराबंकी में शासन सख्त

बाराबंकी में नगर पालिका क्षेत्र के पीरबटावन स्थित राज्यानुदानित मदरसा दारुल उलूम में कथित अनियमितताओं की शिकायत पर उत्तर प्रदेश शासन ने जांच के आदेश दिए हैं। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय समिति गठित कर 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी है। जानकारी के अनुसार, थाना सफदरगंज क्षेत्र के रसौली निवासी सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट मोहम्मद तल्हा अंसारी ने 25 मई 2026 को प्रमुख सचिव, अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग को शिकायत भेजी थी।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मदरसा व्यावसायिक दुकानों की ऊपरी मंजिल पर संचालित हो रहा है, जो नियमावली के अनुरूप नहीं है। साथ ही फर्जी प्रबंध समिति के गठन, शिक्षकों की कथित अवैध नियुक्तियों, वित्तीय अनियमितताओं, आधारभूत सुविधाओं की कमी तथा मदरसे से राजनीतिक गतिविधियां संचालित होने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।

शासन के निर्देश पर अल्पसंख्यक कल्याण निदेशक शीलधर सिंह यादव ने जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारियों एसपी आंबेडकर और सोनकुमार की दो सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति यह जांच करेगी कि मदरसा जिस भवन में संचालित हो रहा है, वहां पर्याप्त स्थान उपलब्ध है या नहीं, भवन का नक्शा स्वीकृत है अथवा नहीं।

समिति शिक्षकों की नियुक्तियां कब और किन नियमों के तहत की गईं, तथा नियुक्तियों को अनुदान स्वीकृत करने वाले तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कौन थे, इसकी भी पड़ताल करेगी। समिति शिकायतकर्ता का पक्ष सुनने के साथ अभिलेखों और उपलब्ध साक्ष्यों का भी परीक्षण करेगी।

उधर, मदरसा प्रबंधन का पक्ष जानने का प्रयास किया गया। प्रबंधक उपलब्ध नहीं हो सके और उन्होंने स्वयं को बाराबंकी से बाहर बताया। वहीं, मदरसे के प्रधानाचार्य मोहम्मद इलियास ने सभी आरोपों को बेबुनियाद और निराधार बताते हुए कहा कि मदरसा सभी नियमों के अनुरूप संचालित हो रहा है। फिलहाल, यह मामला जांच के अधीन है। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का कहना है कि समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद तथ्यों के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।