जौहर विश्वविद्यालय के भीतर बनी सड़क को घोषित किया गया आम रास्ता, यूनिवर्सिटी गेट पर लगाया बोर्ड
सपा नेता आजम खां की जौहर यूनिवर्सिटी के भीतर बनी 3.5 किमी लंबी सड़क को लोक निर्माण विभाग ने आम रास्ता घोषित कर दिया है। विभाग ने यूनिवर्सिटी के गेट पर बोर्ड लगाकर सड़क को लोक निर्माण विभाग की संपत्ति बताते हुए इसे सार्वजनिक मार्ग घोषित किया है। इस सड़क के निर्माण पर 13 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे।
वर्ष 2003-04 में मुलायम सिंह के मुख्यमंत्री रहने के दौरान आजम खां ने जौहर विश्वविद्यालय के प्रस्तावित मानचित्र में मौजूद मुख्य द्वार से होते हुए लोक निर्माण विभाग से लगभग साढ़े तीन किमी लंबी सड़क का निर्माण कराया था। प्रदेश में दोबारा सपा सरकार बनने पर विश्वविद्यालय का निर्माण पूरा कराया गया। इसके बाद मई 2016 में त्वरित आर्थिक विकास योजना के तहत इस सड़क के चौड़ीकरण के लिए 17 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत कराया गया। 13 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से सड़क का चौड़ीकरण कराया गया।
वर्ष 2019 में जौहर विश्वविद्यालय में सरकारी बजट के उपयोग की शिकायत पर तत्कालीन डीएम ने नौ सदस्यीय टीम गठित कर जांच कराई। जांच के दौरान निजी विश्वविद्यालय में सरकारी बजट से कराए गए कार्यों के रिकॉर्ड सामने आए। तत्कालीन डीएम ने मामले को भ्रष्टाचार मानते हुए उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई के लिए रिपोर्ट शासन को भेज दी थी। इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
सरकारी बजट से बनी इस सड़क का उपयोग अब तक केवल विश्वविद्यालय प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में था। अब लोक निर्माण विभाग ने यूनिवर्सिटी के गेट पर बोर्ड लगाकर इसे आम रास्ता घोषित कर दिया है। बोर्ड लगने के बाद इस सड़क से लोगों की आवाजाही शुरू कराने की तैयारी की जा रही है। सपा के कद्दावर नेता आजम खां के ड्रीम प्रोजेक्ट मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों पर बुलडोजर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) के उपाध्यक्ष/डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने विश्वविद्यालय परिसर में बने 40 में से 38 भवनों को बिना नक्शा पास कराए बनाने पर अवैध मानते हुए विश्वविद्यालय प्रबंधन को 20 दिन में खुद हटा लेने और अन्यथा की स्थिति में प्राधिकरण द्वारा ध्वस्त कराने के आदेश दिए हैं। यह आदेश प्राधिकरण द्वारा कुछ दिन पूर्व आरडीए द्वारा जौहर विश्वविद्यालय को जारी नोटिस के सापेक्ष बुधवार को निर्धारित व्यक्तिगत सुनवाई के बाद दिया गया। इस सुनवाई के लिए विश्वविद्यालय के डिप्टी रजिस्ट्रार, अधिवक्ता तथा कुछ प्रतिनिधि आरडीए के वीसी की भूमिका निभा रहे डीएम के समक्ष पेश हुए थे।
इनके जवाब और तर्कों को संतोषजनक न मानते हुए वीसी/डीएम ने 38 भवनों को अवैध निर्माण बताते हुए ध्वस्त करने का आदेश पारित कर दिया। इस कार्रवाई के बाद कुल 40 भवनों वाले विश्वविद्यालय में सिर्फ मेडिकल भवन और अकादमिक ब्लॉक ही बचेंगे। डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि रामपुर के मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण की जांच आरडीए के क्षेत्रीय अवर अभियंता की रिपोर्ट के आधार पर शुरू की गई थी।
इसमें विश्वविद्यालय प्रबंधन को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए थे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आठ जुलाई को अपना जवाब दाखिल किया था। इसमें 15 जुलाई को व्यक्तिगत सुनवाई का मौका दिया गया था। इसी क्रम में विश्वविद्यालय और रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारी और अधिवक्ता बुधवार को उपस्थित हुए।
इसमें विश्वविद्यालय प्रबंधन को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए थे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आठ जुलाई को अपना जवाब दाखिल किया था। इसमें 15 जुलाई को व्यक्तिगत सुनवाई का मौका दिया गया था। इसी क्रम में विश्वविद्यालय और रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारी और अधिवक्ता बुधवार को उपस्थित हुए।
डीएम के मुताबिक सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से तर्क दिया गया कि विश्वविद्यालय सींगनखेड़ा गांव की भूमि पर बना है। 27 सितंबर-2024 से पहले आरडीए के विकास क्षेत्र में सींगनखेड़ा गांव शामिल नहीं था। इसलिए आरडीए से नक्शा स्वीकृत कराने की आवश्यकता नहीं थी। यह क्षेत्र नगर पालिका में भी नहीं था। निर्माण काफी पहले का है, जिसे वर्तमान नियमों के आधार पर अवैध नहीं माना जा सकता।
विश्वविद्यालय पक्ष की इन दलीलों को आरडीए ने स्वीकार नहीं किया। यह माना गया कि भले ही यह स्थान आरडीए या नगर पालिका क्षेत्र में शामिल नहीं था लेकिन मेडिकल भवन और अकादमिक ब्लॉक के भवन का मानचित्र जिला पंचायत से पास कराया गया है, तो शेष 38 भवनों का मानचित्र स्वीकृत क्यों नहीं कराया गया।
दो भवनों का मानचित्र स्वीकृत कराने से यह भी साबित होता है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन को नियमों की जानकारी थी। इसी आधार पर बिना मानचित्र स्वीकृत कराए बने 38 भवनों को अवैध निर्माण मानते हुए उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा-27(1) के तहत प्रदत्त अधिकारों व प्रावधानों के अंतर्गत इनके ध्वस्तीकरण का आदेश पारित किया जा रहा है।
आदेश में कहा गया है कि प्रतिवादीगण इस अवैध निर्माण को 20 दिनों के अंदर स्वयं हटाकर इस कार्यालय को सूचित करें, अन्यथा आरडीए द्वारा निर्धारित अवधि के बाद ध्वस्त कराया जाएगा। इस स्थिति में ध्वस्तीकरण पर होने वाला समस्त व्यय उक्त अधिनियम की धारा 40 के तहत भू-राजस्व बकाया की तरह वसूल किया जाएगा।
