महासमुंद में सामूहिक नकल, प्यून समेत 5 दोषी, एजुकेशन सेक्रेट्री ने हाईकोर्ट में दिया जवाब

महासमुंद जिले के भंवरपुर स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट स्कूल में 12वीं बोर्ड परीक्षा के दौरान सामूहिक नकल कराने के मामले में चपरासी समेत 5 शिक्षकों को दोषी मानते हुए चार्जशीट जारी की गई है। विभागीय जांच पूरी होने के बाद उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा सचिव की ओर से दायर शपथपत्र पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर तक के लिए तय की है। दरअसल, 12वीं बोर्ड परीक्षा के दौरान सामूहिक नकल का मामला सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने मीडिया में प्रकाशित खबरों का स्वत: संज्ञान लिया। इसके बाद मामले को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार कर सुनवाई शुरू की गई।

जानिए क्या है पूरा मामला ?

12वीं की छात्रा नीता जगत ने परीक्षा केंद्र में हो रही सामूहिक नकल का स्टिंग ऑपरेशन किया था। छात्रा का आरोप है कि फिजिक्स, केमिस्ट्री और गणित जैसे विषयों की परीक्षा में ड्यूटी पर तैनात शिक्षक छात्रों को उत्तर बोल-बोलकर लिखवा रहे थे। परीक्षा केंद्र में न तो सख्त जांच हो रही थी और न ही मोबाइल पर रोक थी। छात्र और शिक्षक खुलेआम मोबाइल लेकर परीक्षा हॉल में प्रवेश कर रहे थे।

छात्रा का आरोप है कि जब उसने नकल का विरोध कर केंद्राध्यक्ष से शिकायत की तो उसे चुप रहने की धमकी दी गई। मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और नकल के झूठे मामले में फंसाने की कोशिश भी की गई। छात्रा ने यह भी आरोप लगाया कि उसकी डेस्क पर पहले से लिखी सामग्री छोड़ दी गई थी और विरोध करने पर उसकी सीट बदल दी गई।

आरोप है कि बेहतर परीक्षा परिणाम के दबाव में जिले के कई परीक्षा केंद्रों पर नकल की खुली छूट दी गई। कई केंद्रों से एक जैसे जवाब वाली उत्तर पुस्तिकाएं मिलने की भी शिकायतें सामने आईं। छात्रा ने भंवरपुर परीक्षा केंद्र की परीक्षा निरस्त कर दोबारा परीक्षा कराने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में सुनवाई के दौरान स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव ने शपथपत्र पेश किया। इसमें बताया गया कि जांच के बाद गंगा प्रसाद पटेल (लेक्चरर), अनिरुद्ध आलोक भोई (लेक्चरर), दिनेश कुमार दास (लेक्चरर), दुर्गा प्रसाद पटेल (सहायक शिक्षक एलबी) और विजिया बुडेक (चपरासी) को चार्जशीट जारी की गई है।

सभी कर्मचारियों को निर्धारित समय में अपना जवाब पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद विभागीय जांच नियमानुसार आगे बढ़ाई जाएगी। शपथपत्र में यह भी कहा गया है कि जांच में दोषी पाए जाने पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को एक और व्यक्तिगत शपथपत्र (पर्सनल एफिडेविट) दाखिल करने का निर्देश दिया।

इसमें पांचों आरोपियों के खिलाफ चल रही विभागीय जांच की प्रगति और अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी देने को कहा गया है। साथ ही, यदि जांच पूरी हो जाती है तो उसका अंतिम निष्कर्ष और संबंधित आदेश भी कोर्ट के रिकॉर्ड में पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।