रायपुर में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा, CM-राज्यपाल ने सोने की झाड़ू से निभाई छेरापहरा रस्म
भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के अवसर पर आज रायपुर समेत प्रदेशभर के प्रमुख जगन्नाथ मंदिरों से रथयात्राएं निकाली जा रही हैं। रायपुर के अवंति विहार-गायत्री नगर स्थित जगन्नाथ मंदिर में राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने महाप्रभु के रथ के आगे सोने की झाड़ू लगाकर ‘छेरापहरा’ की रस्म निभाई। इस दौरान सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने पूजा-अर्चना की और भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा को कंधे पर उठाकर रथ तक पहुंचाया। रथयात्रा से पहले मंदिर को फूलों से भव्य तरीके से सजाया गया। जिन रास्तों से रथयात्रा निकली, वहां साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाएं भी पहले से पूरी कर ली गई थीं।
रथयात्रा के दौरान शहर के कई इलाकों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने की संभावना है। इसे देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने कई मार्गों पर डायवर्जन लागू किया है और लोगों से ट्रैफिक पुलिस के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
रथयात्रा की तैयारियों के तहत इस बार भी ओडिशा से आए कलाकार गायत्री नगर स्थित जगन्नाथ मंदिर में पारंपरिक शैली की पेंटिंग और आकर्षक सजावट की गई है। मंदिर की दीवारों, प्रवेश द्वार और रथों को पुरी की तर्ज पर रंग-बिरंगे धार्मिक चित्रों और पारंपरिक अलंकरण से सजाया गया है। वहीं महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा की पूजा-अर्चना और रथयात्रा के सभी धार्मिक अनुष्ठानों को विधि-विधान से संपन्न कराने के लिए ओडिशा से पुजारी भी बुलाए गए थे।
रायपुर की पुरानी बस्ती स्थित टुरी-हटरी का जगन्नाथ मंदिर शहर के सबसे प्राचीन मंदिरों में शामिल है। करीब 500 साल पुराने इस मंदिर को पहले ‘साहूकार मंदिर’ के नाम से जाना जाता था। भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा स्थापित होने के बाद धीरे-धीरे इसकी पहचान जगन्नाथ मंदिर के रूप में बनी।
मंदिर का निर्माण अग्रवाल परिवार ने कराया था। अंग्रेजों के शासनकाल में एक अग्रवाल साहूकार ने मंदिर का विस्तार और सौंदर्यीकरण कराया। इसी वजह से लंबे समय तक इसे साहूकार मंदिर कहा जाता रहा। समय के साथ यहां भगवान जगन्नाथ की आराधना शुरू हुई और मंदिर की पहचान बदल गई।
