सुप्रीम कोर्ट बोला-SIR से नाम कटने पर नागरिकता नहीं जाती
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को वोटर लिस्ट से बाहर किए गए लोगों से जुड़ी याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि वोटर लिस्ट में से नाम हटने से किसी की नागरिकता नहीं जाती है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें मांग की गई है कि बंगाल में जिन लोगों के नाम स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के कारण कट गए हैं उनको सरकारी योजनाओं का लाभ मिलना बंद नहीं होना चाहिए। साथ ही नागरिकता पर अंतिम फैसला होने तक सभी सुविधाएं मिलती रहनी चाहिए। इस मामले में चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने चुनाव आयोग (EC) और पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता प्रसनजीत बोस के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि नागरिकता से जुड़े 34 लाख मामले अभी भी लंबित हैं, जबकि अब तक सिर्फ 38 हजार मामलों का निपटारा हुआ है।
फिलहाल केवल 19 ट्रिब्यूनल काम कर रहे हैं। ट्रिब्यूनलों का कामकाज पारदर्शी बनाने, उनकी वेबसाइट पर सभी आदेश और नियम सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
वोटर लिस्ट से नाम हटने के बाद कई लोगों को राशन, अन्नपूर्णा या दूसरी सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी हो रही है, जबकि उनकी नागरिकता पर अभी फैसला नहीं हुआ है।
जिन लोगों के पास पासपोर्ट जैसे वैध दस्तावेज हैं, उनसे नागरिकता साबित करने के लिए बार-बार दूसरे दस्तावेज न मांगे जाएं।
दरअसल बंगाल सरकार ने पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) के तहत अन्नपूर्णा योजना जैसी योजनाओं का लाभ उन लोगों को देने से मना करने के लिए नोटिफिकेशन जारी किए हैं जिनका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है। दावा किया गया कि उन लोगों को जाति सर्टिफिकेट भी नहीं दिए जा रहे हैं।
पश्चिम बंगाल में SIR की ड्राफ्ट लिस्ट में 58.20 लाख नाम कट गए हैं। ड्राफ्ट लिस्ट से पहले राज्य में 7.66 करोड़ थे, ड्राफ्ट लिस्ट में 7.08 करोड़ वोटर्स का नाम शामिल किया गया।
काटे गए वोटर्स का प्रतिशत 7.6 है, यानी हर 100 से में लगभग 8 वोटर्स का नाम हटाया गया है। हालांकि, 58.20 लाख वोटर्स में से 24.17 लाख मृत पाए गए, 1.38 लाख डुप्लीकेट या फर्जी थे, 32.65 लाख वोटर्स शिफ्ट, लापता और अन्य थे।
