दुनिया की इकलौती सड़क, जो बनी है 12 मंजिला अपार्टमेंट्स के ठीक ऊपर

देश-दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में कई ऐसी इमारतें हैं, जिन्हें देखकर हैरानी होती है. इनमें से किसी बिल्डिंग के बीच से होकर ट्रेन गुजरती है, तो कोई जिद्दी इमारत सड़क के बीचों-बीच खड़ा होता है. ऐसे में आज हम आपको एक ऐसी सड़क के बारे में बताने जा रहे हैं, जो 12 मंजिले अपार्टमेंट्स के ठीक ऊपर बनी हुई है. जब इसके ऊपर से बड़ी-बड़ी गाड़ियां गुजरती हैं, तो नीचे बने घरों की दीवारें भी हिलने लग जाती हैं. इसके बावजूद भी इन घरों में रहने वाले लोग अपना मकान खाली नहीं करना चाहते. अब सोच रहे होंगे कि आखिर ये सड़क है कहां? ऐसे में बता दें कि यह सड़क चीन के गुइयांग शहर में बना है. यह हाईवे किसी खाली जमीन या पहाड़ों के बीच से नहीं, बल्कि एक दर्जन से भी ज्यादा बहुमंजिला रिहायशी अपार्टमेंट्स के ठीक ऊपर से होकर गुजरता है.

इस पुल का नाम शुइकोउसी ब्रिज है, जो आज के समय में चीनी तकनीक का एक शानदार उदाहरण है. जहां दुनियाभर के लोग अपने घरों के ऊपर से गाड़ियों के गुजरने की कल्पना भी नहीं कर सकते, वहीं चीन के हजारों लोग इस हाईवे के नीचे मजे से अपनी जिंदगी जी रहे हैं. शुइकोउसी ओवरपास का निर्माण साल 1997 में ही पूरा हो गया था. लेकिन इसके बनने के तुरंत बाद ही गुइयांग शहर के प्रशासन के सामने एक मुसीबत खड़ी हो गई. 40 लाख से ज्यादा की आबादी वाले इस शहर के बीचों-बीच गरीब और जरूरतमंद लोगों को सस्ते मकान देने के लिए जमीन का एक छोटा सा टुकड़ा भी खाली नहीं बचा था. ऐसे में शहर को बाहर की तरफ फैलाने के बजाय प्रशासन ने इस जुगाड़ से उनके रहने की व्यवस्था कर दी.

प्रशासन ने तय किया कि शहर के बीचों-बीच बने इस ऊंचे पुल के नीचे की खाली पड़ी जमीन का इस्तेमाल रिहायशी इमारतें बनाने के लिए किया जाएगा. पुल के पूरा होने के ठीक दो साल बाद, साल 1999 में इसके नीचे करीब 10 बहुमंजिला रिहायशी इमारतें खड़ी कर दी गईं, जिनमें से कुछ को बाद में बढ़ाकर एक दर्जन से अधिक कर दिया गया. इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा यह था कि गरीब और विस्थापित लोगों को शहर के बिल्कुल बीचों-बीच सस्ते दाम पर रहने के लिए घर मिल गए, जहां से उनके लिए काम-धंधे पर जाना बेहद आसान था. इस फायदे के बदले इन मकानों में रहने वाले लोगों को एक समझौता भी करना पड़ा. चूंकि ये इमारतें सीधे पुल को छूते हुए ऊपर तक जाती हैं, इसलिए दिन-रात हाईवे पर दौड़ने वाले वाहनों का शोर और गाड़ियों के वजन से होने वाला वाइब्रेशन इन घरों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गया.

शुरुआत में एक्सपर्ट्स को लगा था कि गाड़ियों की गड़गड़ाहट और हिलती दीवारों के कारण लोग यहां रहने से मना कर देंगे, लेकिन इसके बिल्कुल उलट हुआ. समय के साथ हजारों लोगों ने इस अनोखे माहौल में खुद को ढाल लिया और इस शोर-शराबे व कंपन को ही अपने घर की अनोखी पहचान मान लिया. हालांकि, लोगों की सहूलियत को देखते हुए बाद में प्रशासन ने इस पुल से भारी और बड़े ट्रकों के गुजरने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी, जिससे शोर और कंपन में काफी हद तक कमी आई है. इसके बावजूद भी आज भी जब तेज रफ्तार में गाड़ियां गुजरती हैं, तो दीवारें हिलने लगती हैं. ऐसे में कहा जा सकता है कि भले ही आज भी धूल-मिट्टी और शोर के कारण यह शहर की सबसे शांत जगह नहीं है, लेकिन यह शहरी आबादी को मैनेज करने का एक शानदार मॉडल जरूर बन चुका है.