स्पेन ने 16 साल बाद फुटबॉल वर्ल्ड कप जीता, फाइनल में अर्जेंटीना को 1-0 से हराया
स्पेन ने 16 साल बाद फुटबॉल वर्ल्ड कप का खिताब जीत लिया। टीम ने न्यूयॉर्क के न्यू जर्सी स्टेडियम में खेले गए फाइनल में 2022 की चैंपियन अर्जेंटीना को 1-0 से हराया। स्पेन के लिए एक्स्ट्रा टाइम में फेरन टोरेस ने गोल किया। इसी के साथ स्पेन ने 2010 के बाद दूसरी बार ट्रॉफी अपने नाम की। तब टीम ने नीदरलैंड को 1-0 से हराया था।
अगर यह मुकाबला 90 मिनट तक बराबरी पर रहा तो इसकी सबसे बड़ी वजह अर्जेंटीना के गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज थे। स्पेन पूरे मैच में लगातार अटैक करता रहा। कभी लामिन यमाल ने बॉक्स के बाहर से शॉट लगाया, कभी ओयारजाबाल ने मौका बनाया तो कभी पेड्री और निको विलियम्स गोल के करीब पहुंचे। हर बार मार्टिनेज ने खुद को गेंद और गोलपोस्ट के बीच खड़ा कर दिया।
कई बार ऐसा लगा कि स्पेन अब गोल कर देगा, लेकिन हर बार मार्टिनेज ने उसे रोक दिया। लेकिन फुटबॉल में लगातार दबाव आखिरकार असर दिखाता है। 106वें मिनट में निको विलियम्स का हेडर फेरन टोरेस तक पहुंचा और इस बार मार्टिनेज भी कुछ नहीं कर सके।
90 मिनट तक अर्जेंटीना किसी तरह मुकाबले में बनी रही। टीम का पूरा भरोसा पेनल्टी शूटआउट पर था, लेकिन इंजरी टाइम में एंजो फर्नांडीज ने ऐसी गलती कर दी, जिसने पूरी बाजी बदल दी।
पाउ क्यूबार्सी पर टैकल के बाद रेफरी ने एंजो को दूसरा यलो कार्ड दिखाया और फिर रेड कार्ड। अर्जेंटीना 10 खिलाड़ियों के साथ रह गई। इसके बाद स्पेन ने गेंद पर और ज्यादा कब्जा जमा लिया। 103वें मिनट में निको विलियम्स ने ऐसा क्रॉस डाला, जिसे देखकर स्पेनिश फैंस जश्न मनाने को तैयार हो गए थे। मिकेल मेरिनो को लगभग खाली गोल मिला, लेकिन उनका हेडर बाहर चला गया।
तीन मिनट बाद वही निको विलियम्स फिर बाएं फ्लैंक से पहुंचे। इस बार उन्होंने बैक पोस्ट पर हेडर से गेंद फेरन टोरेस के सामने गिराई। फेरन टोरेस ने बिना एक पल गंवाए दाएं पैर से ऐसा शॉट लगाया कि गेंद सीधे नेट में जा समाई।
यह फाइनल एक तरह से दो पीढ़ियों का मुकाबला भी था। एक तरफ 39 साल के लियोनेल मेसी थे, दूसरी ओर 20 साल के लामिन यमाल।
मेसी से उम्मीद थी कि वे एक बार फिर बड़े मैच में कमाल कर दिखाएंगे, लेकिन स्पेन की मिडफील्ड और डिफेंस ने उन्हें कभी खुलकर खेलने का मौका ही नहीं दिया। दूसरी ओर यमाल लगातार अर्जेंटीना के डिफेंस पर हमला करते रहे। स्पेन की पहचान हमेशा से गेंद पर नियंत्रण रखने वाली टीम की रही है। इस फाइनल में भी वही अंदाज दिखा। रोड्री ने मिडफील्ड में पूरे मैच की रफ्तार तय की। अर्जेंटीना को काउंटर अटैक का मौका ही नहीं मिला। स्पेन ने करीब 65% समय गेंद अपने पास रखी।
रेफरी की अंतिम सीटी बजते ही स्पेनिश खिलाड़ी मैदान पर दौड़ पड़े। कोई घुटनों के बल बैठ गया, कोई आसमान की ओर देखने लगा, तो कोई अपने साथी खिलाड़ियों से लिपट गया। 16 साल का इंतजार खत्म हो चुका था।
दूसरी ओर अर्जेंटीना के खिलाड़ियों की निराशा साफ दिखाई दे रही थी। कुछ देर बाद दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच नोकझोंक भी हुई, लेकिन मामला जल्द शांत हो गया। इसके बाद ट्रॉफी स्पेन के कप्तान के हाथों में पहुंची और पूरा स्टेडियम ‘वीवा एस्पाना’ (स्पेन जिंदाबाद) के नारों से गूंज उठा।
